स्वतंत्र बोल
रायपुर, 08 मई 2026: बस्तर के जंगलों में सालों से बेकार समझे जाने वाले छिंद के बीज अब एक नई पहचान बनाने जा रहे हैं। जिन बीजों को कभी किसी काम का नहीं माना गया, वही अब कैफीन मुक्त हर्बल कॉफी के रूप में दुनिया के सामने आने की तैयारी में हैं। इस अनोखे प्रयोग ने न सिर्फ लोगों को चौंका दिया है, बल्कि बस्तर की तस्वीर बदलने की उम्मीद भी जगा दी है।
दंतेवाड़ा जिले के बचेली निवासी युवा उद्यमी विशाल हालदार ने यह कर दिखाया है। बीकॉम और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट की पढ़ाई करने वाले विशाल ने नौकरी की राह छोड़ अपनी मिट्टी से जुड़कर ऐसा प्रयोग किया, जिसकी अब हर तरफ चर्चा हो रही है। उन्होंने छिंद यानी खजूर की स्थानीय प्रजाति के बीजों से ऐसी हर्बल कॉफी तैयार की है, जिसमें कैफीन नहीं है, लेकिन स्वाद और खुशबू वैसी ही है जैसी लोग कॉफी में पसंद करते हैं।
हैरानी की बात यह है कि इस कॉफी को तैयार करने के पीछे विशाल ने करीब दो साल तक लगातार रिसर्च और प्रयोग किए। इंटरनेट से जानकारी जुटाई, स्थानीय संसाधनों को समझा और फिर एक ऐसा फॉर्मूला तैयार किया जिसने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उनके इस नवाचार को इनोवेशन महाकुंभ में पहला स्थान मिला और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने उन्हें सम्मानित भी किया।
विशाल का दावा है कि यह हर्बल कॉफी पूरी तरह कैफीन मुक्त है और इसमें प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में मौजूद हैं। यानी अब वे लोग भी कॉफी का स्वाद ले सकेंगे जो कैफीन के कारण इससे दूरी बना लेते थे। यही वजह है कि जब इस कॉफी को शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय जगदलपुर में आयोजित इनोवेशन महाकुंभ में पेश किया गया तो वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी समेत प्रोफेसरों और आम लोगों ने इसकी जमकर तारीफ की।
लेकिन कहानी सिर्फ कॉफी तक सीमित नहीं है। विशाल का सपना इससे कहीं बड़ा है। वे चाहते हैं कि बस्तर के गांवों में रहने वाले लोग छिंद के बीजों से रोजगार कमाएं और जंगलों में बेकार पड़े संसाधन गांवों की कमाई का जरिया बनें। इसी सोच के साथ वे दंतेवाड़ा जिला प्रशासन के यूथ अप फाउंडेशन के जरिए युवाओं को उद्यमिता के लिए प्रेरित भी कर रहे हैं।
हालांकि यह प्रोजेक्ट अभी टेस्टिंग और डेवलपमेंट के दौर में है, लेकिन विशाल का यह प्रयोग साफ संकेत दे रहा है कि आने वाले समय में बस्तर की पहचान सिर्फ जंगलों से नहीं, बल्कि दुनिया को चौंकाने वाली इस खास हर्बल कॉफी से भी हो सकती है।


