स्वतंत्र बोल
बिलासपुर, 08 मई 2026: छत्तीसगढ़ की न्याय व्यवस्था में एक बेहद गंभीर मामले पर बड़ा फैसला सामने आया है। Chhattisgarh High Court ने नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म और अप्राकृतिक कृत्य के मामले में दोषी सौतेले पिता की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखते हुए उसकी अपील खारिज कर दी है।
ट्रायल कोर्ट की सजा पर लगी मुहर
यह मामला पहले ट्रायल कोर्ट में पहुंचा था, जहां आरोपी को गंभीर धाराओं के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। आरोपी ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन अदालत ने सभी दलीलों को खारिज कर दिया।
कोर्ट की डिवीजन बेंच का अहम फैसला
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के बाद साफ किया कि पीड़िता की गवाही पूरी तरह सुसंगत और भरोसेमंद है। कोर्ट ने कहा कि यदि पीड़िता का बयान स्पष्ट और बिना बड़े विरोधाभास के हो, तो उसी आधार पर दोष सिद्ध किया जा सकता है।
डर और धमकी के बीच सामने आया सच
अदालत ने यह भी माना कि बच्ची ने शुरुआत में डर और धमकी के कारण घटना को छिपाया था, लेकिन बाद में चाइल्ड लाइन टीम के संपर्क में आने के बाद उसने पूरी घटना का खुलासा किया।
बच्चों के खिलाफ अपराध पर सख्त संदेश
Chhattisgarh High Court ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि बच्चों के खिलाफ यौन अपराध अत्यंत गंभीर प्रकृति के होते हैं और ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती।
जमानत रद्द, सरेंडर का आदेश
कोर्ट ने आरोपी की जमानत भी रद्द कर दी है और उसे चार सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। यह फैसला न सिर्फ इस मामले में न्याय सुनिश्चित करता है, बल्कि ऐसे अपराधों के खिलाफ सख्त संदेश भी देता है।


