स्वतंत्र बोल
रायपुर 29 मई 2025. पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलसचिव रहे शैलेन्द्र पटेल को कुलसचिव पद और विश्वविद्यालय दोनों से हटा दिया गया है। उच्च न्यायालय बिलासपुर द्वारा 22 मई को पारित आदेशों के बाद 28 मई को आधी रात पटेल को उच्च शिक्षा संचालनालय अटैच करने और डॉ अंबर व्यास को प्रभारी कुलसचिव का आदेश जारी हुआ। शैलेन्द्र पटेल साल 2018 से रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में बतौर उपकुलसचिव पदस्थ था, मई 2022 में तत्कालीन कुलपति केशरी लाल वर्मा ने उसे कुलसचिव का प्रभार सौपा था। तब से लेकर 22 मई 2025 तक लगातार तीन वर्षो तक प्रदेश के सबसे बड़े विश्वविद्यालय का कुलसचिव रहा, इस दौरान विश्वविद्यालय अनियमितता, गड़बड़ी और भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया था। विरोध करने वाले विश्वविद्यालयीन कर्मियों, छात्र संघो के पदाधिकारियों को एफआईआर करने और जेल भेजने की धमकी दी जाने लगी। इन तीन सालो में कर्मचारियों के वरिष्ठता सूची में गड़बड़ी, पदोन्नति और पदावनत करने में अनियमितता हुई, साल 2022 की भीषण गर्मी के महीनो में कर्मियों को भूख हड़ताल करना पड़ा था। पटेल ने एक पत्रकार के खिलाफ भी मनगढंत आरोप लगाकर अपराध दर्ज करा दिया था। इन तीन सालो में उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी उसे लगातार सरंक्षण देते रहे। स्वतंत्र बोल लगातार शैलेन्द्र पटेल के फर्जीवाड़ा और विश्वविद्यालय में व्याप्त अराजकता को प्रमुखता से प्रकाशित करता रहा।
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आदेश कॉपी जारी होने में देरी-
22 मई को उच्च न्यायालय के आदेशों के बाद पटेल को हटाया जाना था, पर उच्च शिक्षा विभाग में बैठे पटेल के सहयोगी अधिकारी पटेल को लगातार बचाने में में प्रयासरत थे। मीडिया के बढ़ते दबाव के बाद 28 मई की देर रात आदेश जारी हुआ, पर उसे सार्वजनिक नहीं होने दिया। 29 मई की शाम को आदेश सार्वजनिक हुआ जिसमे डॉ अम्बर व्यास को प्रभारी कुलसचिव बनाया गया। शैलेन्द्र कुमार पटेल को रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय से हटाकर उच्च शिक्षा संचालनालय नवा रायपुर अटैच किया गया है। संचालनालय की पोस्टिंग पनिशमेंट मानी जाती है और वहा पटेल का काम क्लर्क सा होगा। आदेशों के बाद पटेल के हाथ से रजिस्ट्रार की कुर्सी, सरकारी गाडी और सरकारी बंगला भी छूट गया है।
उपकुलसचिव पद पर भी अयोग्य-
शैलेन्द्र कुमार पटेल की सरकारी सेवा में पहली नियुक्ति साल 2016 में हुआ था, तत्कालीन में उपकुलसचिव पद हेतु निर्धारित योग्यता को पटेल पूरा नहीं करता है। उच्च शिक्षा विभाग की जाँच में प्रमाणित हुआ है, जिस पर कार्यवाही करने आयुक्त कार्यालय ने मंत्रालय फाइल भेजा है।
रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलसचिव की पीएचडी, एमफिल की डिग्री फर्जी…!

