स्वतंत्र बोल
नई दिल्ली, 03 अप्रैल 2026: आम आदमी पार्टी के अंदर सियासी घमासान तेज होता नजर आ रहा है। राघव चड्ढा को राज्यसभा में उप-नेता पद से हटाए जाने के बाद अब उन्होंने खुलकर पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है।
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शुक्रवार को सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में राघव चड्ढा ने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें “चुप कराया जा सकता है, लेकिन हराया नहीं जा सकता।” उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उन्हें संसद में बोलने से रोकने की कोशिश की गई है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों पर सवाल खड़ा करता है।
अपने संदेश में चड्ढा ने कहा कि जब भी उन्हें संसद में बोलने का मौका मिला, उन्होंने हमेशा आम जनता से जुड़े मुद्दों को उठाया। उन्होंने सवाल किया कि क्या जनता की आवाज उठाना कोई अपराध है? क्या उन्होंने ऐसा कुछ गलत किया है, जिसके कारण उन्हें इस तरह साइडलाइन किया जा रहा है?
चड्ढा ने दावा किया कि पार्टी ने सचिवालय से अनुरोध किया है कि उन्हें संसद में बोलने का समय न दिया जाए। यह बयान ऐसे समय आया है जब एक दिन पहले ही आम आदमी पार्टी ने उन्हें राज्यसभा के उप-नेता पद से हटा दिया।
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी का बड़ा फैसला माना जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर चड्ढा को हटाने की सिफारिश की और उनकी जगह पंजाब से सांसद अशोक मित्तल का नाम प्रस्तावित किया।
गौरतलब है कि राघव चड्ढा को कभी केजरीवाल का बेहद करीबी माना जाता था और उन्होंने दिल्ली व पंजाब में पार्टी की रणनीति और संचालन में अहम भूमिका निभाई है। ऐसे में उनका यह खुला विरोध AAP के भीतर किसी बड़े मतभेद की ओर इशारा कर रहा है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह सिर्फ एक पद से हटाए जाने का मामला है या फिर पार्टी के अंदर कोई गहरी दरार बन चुकी है, जो आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा कर सकती है।
