स्वतंत्र बोल
रायपुर 28 अक्टूबर 2026: छत्तीसगढ़ के पंडित सुंदरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों को बेहतर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की तैयारी शुरू हो गई है। विश्वविद्यालय में पांच नए रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम शुरू करने का फैसला लिया गया है। इसके लिए विश्वविद्यालय परिसर में ‘परिणाम आधारित प्रबंधन (आरबीएम)’ और ‘स्नातक रोजगार-योग्यता ढांचे’ पर आधारित तीन दिवसीय कार्यशाला और क्षमता निर्माण कार्यक्रम शुरू किया गया है। कॉमनवेल्थ ऑफ लर्निंग की इकाई सीओएल-सीईएमसीए (नई दिल्ली) और विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह कार्यशाला 29 अक्टूबर तक चलेगी, जिसमें नए पाठ्यक्रमों की रूपरेखा तैयार कर एक महीने के भीतर कार्ययोजना बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
स्थानीय आवश्यकताओं और राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर जोर
उद्घाटन सत्र में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वीरेंद्र कुमार सारस्वत ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत विद्यार्थियों में आत्मनिर्भरता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देना प्राथमिकता है। छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा, वन संपदा और स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ऐसे पाठ्यक्रम तैयार किए जाने चाहिए जो कौशल विकास के साथ रोजगार के द्वार खोल सकें। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के 37 पाठ्यक्रमों की स्वाध्ययन सामग्री तैयार की जा चुकी है, और अब उद्योगों की मांग तथा बदलती तकनीक के अनुसार नए कोर्स विकसित किए जा रहे हैं।
बायोफ्यूल, ग्रीन हाइड्रोजन और एआई पर फोकस
ऑनलाइन संबोधन में सीओएल-सीईएमसीए के निदेशक डॉ. बी. शद्रेक ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कृषि, आईटी, हरित ऊर्जा, बायोफ्यूल और ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्रों में रोजगार की असीम संभावनाएं हैं। उच्च शिक्षा संस्थानों को भविष्य की कौशल जरूरतों के हिसाब से खुद को ढालना होगा। वहीं, कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि डॉ. सोमी अग्रवाल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के दौर में युवाओं की रोजगार-योग्यता सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है, जिसे मुक्त विश्वविद्यालय अपने नए पाठ्यक्रमों के जरिए आसान बना सकता है।
प्रवेश के साथ मिलेगी डिजिटल अध्ययन सामग्री
कुलपति प्रो. सारस्वत ने जानकारी दी कि विद्यार्थियों को अब प्रवेश के समय ही अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने की योजना पर काम चल रहा है। इसके तहत एआई की मदद से विभिन्न विषयों के वीडियो तैयार कर विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड किए जा रहे हैं, जिससे दूरस्थ शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों को पढ़ाई में आसानी होगी। कार्यशाला के दौरान डिजिटल दक्षता, संप्रेषण कौशल और माइक्रो-क्रेडेंशियल जैसे विषयों पर भी मंथन किया जा रहा है।


