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धर्म डेस्क 14 अक्टूबर 2026: बिहार के नालंदा जिले के घोसरावां गांव स्थित प्रसिद्ध मां आशापुरी मंदिर में नवरात्रि के दौरान महिलाओं के प्रवेश पर रोक रहती है। यह रोक प्रतिपदा से लेकर विजयादशमी की आरती पूरी होने तक लागू रहती है। पुजारियों और ग्रामीणों के मुताबिक, मंदिर में इन दिनों विशेष तांत्रिक पूजा होती है। इसी परंपरा के चलते महिलाओं का प्रवेश निषेध माना जाता है।
नवरात्रि में महिलाओं के प्रवेश पर क्यों है रोक?
मां आशापुरी मंदिर बिहार शरीफ जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर गिरियक प्रखंड के घोसरावां गांव में स्थित है। यहां नवरात्रि के दौरान विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
पुजारियों और ग्रामीणों के अनुसार, यह क्षेत्र प्राचीन काल से तंत्र साधना का केंद्र रहा है। मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान यहां तांत्रिक साधक विशेष अनुष्ठान करते हैं। इसी परंपरा और अनुशासन के तहत इन दिनों महिलाओं के प्रवेश पर रोक रहती है।
कैसे पड़ा मां आशापुरी मंदिर का नाम?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, बौद्ध काल में यहां करीब 1,800 बौद्ध भिक्षु अपनी मन्नतें मांगने आते थे। मान्यता है कि उनकी इच्छाएं पूरी होती थीं। इसी विश्वास के चलते मंदिर का नाम आशापुरी पड़ा।
किंवदंतियों के मुताबिक, राजा घोष ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था। मान्यता है कि इसी स्थान पर मां आशापुरी प्रकट हुई थीं। उनके नाम से ही गांव का नाम घोसरावां पड़ने की बात कही जाती है।
बिहार के बाहर से भी पहुंचते हैं श्रद्धालु
नवरात्रि के दौरान मंदिर में दर्शन और पूजा के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। दी गई जानकारी के मुताबिक, बिहार के अलावा कोलकाता, ओडिशा, मध्य प्रदेश, असम, दिल्ली और झारखंड से भी भक्त यहां आते हैं।
महिलाओं के प्रवेश पर रोक के बावजूद मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था बनी हुई है। यह परंपरा आज भी निभाई जाती है।


