पूर्व मंत्री के घर पहुंची ED की टीम, 15 ठिकानों पर छापेमारी..जानें क्या हैं पूरा मामला

Kolkata ED raid MassArt

स्वतंत्र बोल
कोलकाता 29 सितंबर 2026:
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कोलकाता टीम ने बुधवार को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए ‘मासआर्ट’ (MassArt) सोसाइटी से जुड़े 15 ठिकानों पर छापेमारी शुरू की। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की धारा 17 के तहत की जा रही है। संस्था पर पश्चिम बंगाल में आयोजित होने वाले दुर्गा पूजा के ‘प्रीव्यू शो’ से संबंधित फंड में गंभीर वित्तीय अनियमितता करने का आरोप है।

ad

पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन और करीबियों के ठिकानों पर दबिश

ईडी के अनुसार, मासआर्ट संस्था ने दुर्गा पूजा के प्रीव्यू शो आयोजित करने के बहाने आम लोगों से एक बड़ी रकम जुटाई थी। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस जुटाई गई राशि का उपयोग संस्था से जुड़े लोगों ने अपने निजी लाभ के लिए किया। इस पूरी कार्रवाई के दायरे में पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन और उनके कई करीबी सहयोगी भी शामिल हैं।

youtube

UNESCO का फर्जी हवाला देकर पैसे जुटाने का आरोप

जांच में यह बात भी सामने आई है कि मासआर्ट ने खुद को यूनेस्को (UNESCO) से प्रायोजित संस्था बताकर लोगों से धन एकत्र किया। ईडी की टीम फिलहाल छापों के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेजों, खातों और संदिग्ध वित्तीय रिकॉर्ड्स की बारीकी से जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि जब्त किए जा रहे सबूत इस वित्तीय गड़बड़ी का पर्दाफाश करने में अहम साबित होंगे।

15 ठिकानों पर जारी है जांच अभियान

वर्तमान में ईडी की टीमें पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन और मासआर्ट संस्था से संबंधित कुल 15 ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। जांच अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि तलाशी प्रक्रिया पूरी होने और साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद मामले में आगे की सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

MBECL और प्रमोटरों पर भी ईडी का शिकंजा

इससे पहले 23 सितंबर को ईडी ने मैसर्स मैकनेली भारत इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड (MBECL) और उसके प्रमोटरों संजय पासारी, राजीव पासारी, रवि टोडी व सुधीर सतनालीवाला के परिसरों पर छापेमारी की थी। उस जांच में विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के उल्लंघनों और CIRP प्रक्रिया में हेरफेर के सबूत मिले हैं। कंपनी पर ₹6,828 करोड़ के दावों में से ₹5,015 करोड़ स्वीकार होने के बावजूद केवल ₹441 करोड़ की समाधान योजना को मंजूरी दी गई थी।