स्वतंत्र बोल
बिलासपुर, 17मई 2025: थ्रेशरमशीन के लिए बिजली लाइन जोड़ते समय मिस्त्री की मौत के मामले में दोषी ठहराए गए किसानों को आखिरकार 21 वर्षों की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद न्याय मिला है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने फैसले में कहा कि यह दुर्घटना मृतक की लापरवाही के कारण हुई थी, न कि किसानों की गलती से।
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घटना मई 2004 की है जब सीतापुर थाना क्षेत्र के ग्राम तेलईधार निवासी याचिकाकर्ता शमीम खान व तीन अन्य किसानों ने अपनी गेहूं की फसल के लिए थ्रेशर मशीन लगवाई थी। इसके लिए उन्होंने गांव के ही युवक शाहजहां को बिजली पोल से मशीन की लाइन जोड़ने के लिए बुलाया। लाइन जोड़ते समय शाहजहां बिजली पोल पर चढ़ा, जहां करंट लगने से वह झुलस गया और नीचे गिर गया। उसे इलाज के लिए सीतापुर और फिर रायपुर ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में उसकी मौत हो गई।
घटना के बाद पुलिस ने जांच कर किसानों के खिलाफ धारा 304 ए (लापरवाही से मृत्यु का कारण) के तहत अपराध दर्ज किया और चालान पेश किया।
अंबिकापुर न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी ने सभी आरोपियों को छह-छह माह की कैद व 400 रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई। इसके बाद किसानों ने सत्र न्यायालय में अपील की, लेकिन 2010 में वह भी खारिज हो गई।
आखिरकार, किसानों ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का रुख किया। मामले की सुनवाई के दौरान सामने आया कि मृतक पेशेवर इलेक्ट्रीशियन नहीं था, बल्कि मैकेनिकल कार्य करता था। गवाहों ने भी यह स्पष्ट किया कि किसानों ने उस पर बिजली पोल में चढ़ने का कोई दबाव नहीं डाला था। वह स्वयं अपनी इच्छा से यह कार्य कर रहा था, जबकि उसे इसके खतरों की जानकारी थी।
इन तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने मृतक की मृत्यु को उसकी स्वयं की लापरवाही मानते हुए याचिकाकर्ता किसानों को दोषमुक्त करार दिया।
