ट्रंप के टैरिफ के बीच भारत को बड़ा फायदा? FTA से GDP में जुड़ सकते हैं 140 अरब डॉलर

Cargo ships at container port

स्वतंत्र बोल
नई दिल्ली 13 अक्टूबर 2026:
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति ने वैश्विक व्यापार की दिशा बदल दी है। इस बीच भारत ने कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) पर बातचीत तेज की और कुछ समझौतों को लागू भी किया। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, विश्व व्यापार संगठन (WTO) के विकसित वैश्विक अर्थव्यवस्था मॉडल पर आधारित अनुमान बताता है कि इन समझौतों से 2035 तक भारत की GDP में करीब 140 अरब डॉलर जुड़ सकते हैं। इससे नए बाजार खुलने, आयात की लागत घटने, विदेशी निवेश बढ़ने और उत्पादकता में सुधार की उम्मीद है।

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ट्रंप के टैरिफ से कैसे बदला ग्लोबल ट्रेड?

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2025 में डोनाल्ड ट्रंप के व्हाइट हाउस लौटने के बाद अमेरिका ने टैरिफ बढ़ाए। इससे दुनिया के देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों को नए सिरे से तय करने की प्रक्रिया तेज हुई।

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रिपोर्ट के मुताबिक, 19 महीने के उतार-चढ़ाव के बाद अगस्त में अमेरिका की औसत टैरिफ दर 10.7% रहने का अनुमान था। 2024 में यह दर 2.3% थी। कारों और धातुओं जैसे क्षेत्रों पर अलग-अलग शुल्क लगाए गए। इसके अलावा, जबरन मजदूरी के खिलाफ कार्रवाई के तहत सेक्शन 301 के अंतर्गत देश-विशेष शुल्क भी तय किए गए, जो लगभग 10% से 12.5% तक थे।

रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि इस स्तर के टैरिफ से पिछली सरकार की तुलना में अमेरिका में वस्तुओं का आयात करीब 15% तक घट सकता है। टैरिफ बढ़ाने की धमकियों और जांच से आगे और शुल्क बढ़ने की आशंका भी जताई गई है।

दूसरे देशों ने व्यापारिक साझेदार बढ़ाए

अमेरिकी टैरिफ के जवाब में कई देश अपने व्यापारिक रिश्तों में विविधता लाने और नए साझेदारों के साथ समझौते करने में जुटे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, 2025 की शुरुआत से यूरोपीय संघ ने मर्कोसुर और मैक्सिको के साथ नए या अपडेटेड समझौते किए। उसने इंडोनेशिया, भारत और ऑस्ट्रेलिया के साथ बातचीत भी पूरी की।

एसोसिएशन ऑफ साउथईस्ट एशियन नेशंस (ASEAN) और चीन ने अक्टूबर 2025 में उन्नत मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए। कनाडा ने 2025-26 के दौरान कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए। साथ ही, दूसरे व्यापारिक समझौतों को शुरू करने, तेज करने या दोबारा शुरू करने की दिशा में कदम उठाए।

भारत ने किन देशों के साथ बढ़ाए व्यापारिक रिश्ते?

भारत ने भी नए बाजारों तक पहुंच बनाने के लिए कई देशों और समूहों के साथ व्यापारिक समझौतों पर काम किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 2025-26 के दौरान यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA), ब्रिटेन और ओमान के साथ समझौते लागू हुए। ये समझौते ऑस्ट्रेलिया और संयुक्त अरब अमीरात के साथ 2022 में लागू हुए समझौतों के अतिरिक्त हैं।

भारत ने न्यूजीलैंड के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए और यूरोपीय संघ के साथ बातचीत पूरी की। इसके अलावा, भारत यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन समेत दूसरे साझेदारों के साथ बातचीत कर रहा है। गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के साथ भी समझौता करने की कोशिश जारी है।

अमेरिका के साथ व्यापारिक रिश्तों में क्या बदला?

फरवरी 2025 में डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते की योजना की घोषणा की थी। इसके बाद भारत ने अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने की कोशिश की। हालांकि, यह प्रक्रिया उतार-चढ़ाव भरी रही।

रिपोर्ट के अनुसार, 2025 की दूसरी छमाही में अमेरिका के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में भारत को सबसे अधिक अतिरिक्त टैरिफ का सामना करना पड़ा। वॉशिंगटन ने भारत पर 25% पारस्परिक टैरिफ और रूस से तेल खरीदने से जुड़ा 25% अतिरिक्त शुल्क लगाया था।

बाद में दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव कुछ कम हुआ। अमेरिका ने रूस से जुड़े 25% अतिरिक्त टैरिफ को हटा दिया और फरवरी में भारत पर पारस्परिक टैरिफ की दर घटाकर 18% कर दी। हालांकि, कुछ क्षेत्रों पर अलग से लगाए गए टैरिफ लागू रहे।

क्या भारत-अमेरिका के बीच बड़ा समझौता आसान होगा?

रिपोर्ट के अनुसार, जबरन मजदूरी से जुड़ी कार्रवाई के तहत सेक्शन 301 में भारत के लिए 10% की दर तय की गई है। यह दर कई अन्य व्यापारिक साझेदारों पर लागू 12.5% की दर से कम है। इस बदलाव से अंतरिम समझौते का रास्ता बन सकता है।

हालांकि, भारत और अमेरिका के बीच व्यापक व्यापार समझौते तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में भारत के दूसरे देशों के साथ व्यापारिक समझौते उसके लिए नए बाजार खोलने और वैश्विक व्यापार में साझेदारी बढ़ाने का रास्ता बन सकते हैं।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में दिए गए अनुमान के मुताबिक, इन समझौतों से 2035 तक भारत की GDP में करीब 140 अरब डॉलर जुड़ सकते हैं। यह अनुमान है, वास्तविक आर्थिक बढ़ोतरी की गारंटी नहीं।