Income Tax Rules 2026: वैल्यूअर्स और टैक्स प्रैक्टिशनर्स के लिए बढ़ी रजिस्ट्रेशन की तारीख

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स्वतंत्र बोल
नई दिल्ली 20 सितंबर 2026.
  CBDT ने Income Tax Rules 2026 में कई बदलाव किए हैं। नए संशोधन में Form 169 और Form 171 के प्रारूप में जरूरी बदलाव किए गए हैं। साथ ही, इन फॉर्म से जुड़ी अनुपालन प्रक्रिया की समय-सीमा भी बढ़ाई गई है। इसके अलावा, वैल्यूअर और रजिस्टर्ड इनकम टैक्स प्रैक्टिशनर्स के लिए पंजीकरण की अंतिम तारीख 30 सितंबर 2026 से बढ़ाकर 31 मार्च 2027 कर दी गई है।

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इन बदलावों का उद्देश्य कर अनुपालन प्रक्रिया को अधिक आसान और स्पष्ट बनाना बताया गया है। CBDT ने तकनीकी पहलुओं और करदाताओं की ओर से मिले सुझावों को ध्यान में रखते हुए संशोधित फॉर्म में बदलाव किए हैं। समय-सीमा बढ़ने से संबंधित करदाताओं, कंपनियों और टैक्स प्रोफेशनल्स को दस्तावेज और विवरण जमा करने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।

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नियम 176 में इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन से जुड़ा बदलाव

नियम 176 में कम्युनिकेशन के तरीके से जुड़ी शब्दावली में बदलाव किया गया है। इसमें ‘डिजिटल सिग्नेचर लगाकर’ की जगह ‘इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन के जरिए’ यानी ‘by way of an electronic communication’ शब्द जोड़े गए हैं।

टैक्स रिकवरी नियमों में संशोधन

CBDT ने नियम 225 में भी बदलाव किया है। यह नियम टैक्स रिकवरी से संबंधित है। संशोधन के तहत इस नियम के कुछ प्रावधान हटाए गए हैं। इनमें गिरफ्तारी और हिरासत से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं।

संशोधन के बाद संबंधित टैक्स रिकवरी प्रावधानों में गिरफ्तारी और हिरासत का उल्लेख नहीं रहेगा।

वैल्यूअर के रजिस्ट्रेशन के लिए अब 31 मार्च 2027 तक समय

नियम 246 के तहत वैल्यूअर के तौर पर रजिस्ट्रेशन कराने की पहले तय समय-सीमा 30 सितंबर 2026 थी। इसे बढ़ाकर अब 31 मार्च 2027 कर दिया गया है। यानी आवेदकों को रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी करने के लिए छह महीने का अतिरिक्त समय मिलेगा।

इनकम टैक्स प्रैक्टिशनर्स को भी राहत

नियम 256 के तहत रजिस्टर्ड इनकम टैक्स प्रैक्टिशनर्स के रजिस्ट्रेशन की समय-सीमा भी बढ़ाई गई है। पहले इसके लिए 30 सितंबर 2026 की तारीख तय थी। अब इसे बढ़ाकर 31 मार्च 2027 कर दिया गया है।

टैक्स ऑडिट रिपोर्ट की समय-सीमा 30 सितंबर 2026

वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इनकम टैक्स ऑडिट की समय-सीमा 30 सितंबर 2026 है। यह समय-सीमा करदाताओं के एक खास समूह पर लागू होती है।

टैक्स ऑडिट चार्टर्ड अकाउंटेंट यानी CA ही कर सकते हैं। ऑडिट पूरा होने के बाद CA को करदाता की ओर से इनकम टैक्स ई-फाइलिंग सिस्टम पर टैक्स ऑडिट रिपोर्ट अपलोड करनी होती है।

इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की धारा 44AB के तहत संबंधित करदाताओं को अपने खातों का ऑडिट चार्टर्ड अकाउंटेंट से करवाना और टैक्स ऑडिट रिपोर्ट जमा करना होता है।