चाणक्य नीति: दूध से ढके जहर के घड़े जैसे होते हैं ये लोग, चाणक्य से जानें बचाव के उपाय

Untitled

आचार्य चाणक्य को महान दूरदर्शी, अर्थशास्त्री और राजनीतिज्ञ माना जाता है। उनकी नीतियों में जीवन से जुड़ी कई बातें बताई गई हैं। चाणक्य नीति के एक श्लोक में ऐसे लोगों से सावधान रहने की बात कही गई है, जो सामने मीठी बातें करते हैं, लेकिन पीठ पीछे आपके काम बिगाड़ते हैं। चाणक्य ऐसे लोगों से दूरी बनाने की सलाह देते हैं। उन्होंने ऐसे मित्र की तुलना ऊपर से दूध से भरे, लेकिन अंदर से जहर वाले घड़े से की है।

ad

क्या कहता है चाणक्य नीति का श्लोक?

परोक्षे कार्यहन्तारं प्रत्यक्षे प्रियवादिनम्।
वर्जयेत्तादृशं मित्रं विषकुम्भं पयोमुखम्॥

youtube

श्लोक का अर्थ

चाणक्य के अनुसार, जो व्यक्ति आपके सामने मीठी बातें करता है और पीठ पीछे आपके काम बिगाड़ता है या साजिश करता है, ऐसे मित्र को त्याग देना चाहिए। उन्होंने ऐसे व्यक्ति की तुलना उस घड़े से की है, जो ऊपर से दूध से भरा दिखाई देता है, लेकिन अंदर जहर होता है।

इन 5 तरह के लोगों से सावधान रहने की बात

1. दुष्ट स्वभाव वाले मित्र

चाणक्य के अनुसार, जो मित्र केवल अपना भला चाहता है और आपके नुकसान की परवाह नहीं करता, उसे त्याग देना चाहिए। स्वार्थ के लिए जुड़े लोग संकट के समय साथ छोड़ सकते हैं।

2. मीठा बोलने वाले कपटी लोग

जो लोग सामने आपकी बहुत तारीफ करते हैं, लेकिन मन में ईर्ष्या रखते हैं, उनसे सावधान रहने की बात कही गई है। चाणक्य के अनुसार, सच्चा मित्र वही होता है जो समय-समय पर सही मार्गदर्शन करे और आपके अच्छे-बुरे के बारे में बताए।

3. मूर्ख या अज्ञानी व्यक्ति

चाणक्य के अनुसार, मूर्ख व्यक्ति को सलाह देना या उसके साथ रहना परेशानी का कारण बन सकता है। ऐसे लोग अनजाने में नुकसान कर सकते हैं। इसलिए उनके सामने अपनी गोपनीय बातें साझा करने से भी बचना चाहिए। समझ की कमी के कारण वे आपकी निजी बात दूसरों तक पहुंचा सकते हैं।

4. अहंकारी और क्रोधी स्वभाव के लोग

क्रोध में व्यक्ति सही और गलत का अंतर भूल सकता है। चाणक्य के अनुसार, अहंकारी और क्रोधी स्वभाव के लोग खुद के साथ दूसरों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए ऐसे लोगों से उचित दूरी रखने की बात कही गई है।

5. आलसी और कामचोर लोग

चाणक्य के अनुसार, जो व्यक्ति खुद कोई प्रयास नहीं करता, वह दूसरों की तरक्की से ईर्ष्या कर सकता है। ऐसे व्यक्ति की संगति से लक्ष्य से भटकने की बात कही गई है। इसलिए आलसी और कामचोर लोगों से दूरी रखने की सलाह दी गई है।

चाणक्य नीति का सार

इस नीति में चाणक्य ने संगति को महत्वपूर्ण बताया है। खासतौर पर ऐसे लोगों से सावधान रहने की बात कही गई है, जो सामने अच्छे व्यवहार का दिखावा करते हैं, लेकिन पीछे से नुकसान पहुंचाते हैं। नीति का मुख्य संदेश यही है कि व्यक्ति को अपने आसपास के लोगों को समझकर उनके साथ व्यवहार करना चाहिए।