गणेश विसर्जन 2026: कल विदा होंगे बप्पा, जानें शुभ मुहूर्त और विधि

Ganesh visarjan in goa

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गणेश चतुर्थी से शुरू हुआ गणेश महोत्सव अब विसर्जन के साथ संपन्न होगा। द्रिक पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर की रात 11 बजकर 18 मिनट पर शुरू होगी और 25 सितंबर की रात 11 बजकर 6 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में गणेश विसर्जन 25 सितंबर, शुक्रवार को किया जाएगा। इस दिन घरों और पंडालों में स्थापित भगवान गणेश की प्रतिमाओं का विधि-विधान से विसर्जन किया जाएगा। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से चतुर्दशी तक भगवान गणेश की विशेष उपासना की जाती है। चतुर्थी के दिन घरों और पंडालों में गणेश प्रतिमा स्थापित की जाती है। कई परंपराओं में गणेश उत्सव की इस अवधि को गणेश नवरात्रि भी कहा जाता है। मान्यता है कि विसर्जन के समय भगवान गणेश को श्रद्धा के साथ विदाई दी जाती है। भक्त प्रार्थना करते हैं कि उनके जीवन के दुख, संकट और परेशानियां भी गणपति के साथ विदा हो जाएं।

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गणेश विसर्जन के शुभ चौघड़िया मुहूर्त

गणेश विसर्जन के लिए दिन में अलग-अलग शुभ चौघड़िया मुहूर्त बताए गए हैं।

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  • प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत): सुबह 6:11 बजे से 10:42 बजे तक।
  • अपराह्न मुहूर्त (शुभ): दोपहर 12:13 बजे से 1:43 बजे तक।
  • अपराह्न मुहूर्त (चर): शाम 4:44 बजे से 6:14 बजे तक।
  • रात्रि मुहूर्त (लाभ): रात 9:14 बजे से 10:43 बजे तक।
  • रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर): 26 सितंबर की रात 12:13 बजे से सुबह 4:42 बजे तक।

कैसे करें गणेश प्रतिमा का विसर्जन?

विसर्जन वाले दिन संभव हो तो सुबह स्नान आदि करके व्रत या फलाहार का संकल्प लिया जा सकता है। इसके बाद घर में स्थापित भगवान गणेश की विधिवत पूजा करें। पूजा में नारियल, शमी पत्र, धूप और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें। पूजा पूरी होने के बाद भगवान गणेश की आरती करें। इसके बाद परिवार के सुख, शांति, स्वास्थ्य और मंगल की कामना करें। पूजा के बाद गणेश प्रतिमा को सम्मानपूर्वक विसर्जन के लिए ले जाएं। अगर प्रतिमा छोटी है तो उसे सावधानी और श्रद्धा के साथ ले जाया जा सकता है। विसर्जन के दौरान गणेश जी को अर्पित किए गए अक्षत में से कुछ अक्षत घर में रखने या घर में छिड़कने की परंपरा भी कई जगहों पर है।

विसर्जन के समय किन बातों का ध्यान रखें?

धार्मिक परंपराओं में भगवान की प्रतिमा को ले जाते समय शुद्धता और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखने की बात कही जाती है। कुछ लोग विसर्जन के दौरान नंगे पैर जाने की परंपरा का पालन करते हैं। इसके अलावा चमड़े से बनी वस्तुओं, जैसे बेल्ट या पर्स आदि से परहेज करने की परंपरा भी कुछ जगहों पर है।