स्वतंत्र बोल
नई दिल्ली 27 सितम्बर 2026 :कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने ईपीएफओ कवरेज के लिए सैलरी लिमिट में बदलाव किया है। इसे 15,000 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 25,000 रुपये किया गया है। संशोधित सीमा अक्टूबर 2026 से लागू होगी। सरकार को उम्मीद है कि इस बदलाव से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी ईपीएफओ के दायरे में आएंगे। इसके साथ ही पात्र कर्मचारियों की सैलरी से पीएफ कटौती भी बढ़ेगी।
15 हजार से बढ़कर 25 हजार हुई सैलरी लिमिट
अब तक ईपीएफओ कवरेज के लिए 15,000 रुपये प्रति माह की सैलरी लिमिट तय थी। नई व्यवस्था में यह सीमा बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दी गई है।
इसका असर उन कर्मचारियों पर पड़ेगा जिनकी बेसिक सैलरी पहले तय सीमा से ज्यादा होने के कारण वैधानिक ईपीएफओ कवरेज के दायरे में नहीं आती थी। अब 25,000 रुपये तक की सीमा के भीतर आने वाले कर्मचारी अनिवार्य कवरेज के तहत आएंगे।
20 हजार रुपये बेसिक सैलरी वाले कर्मचारी पर क्या असर?
उदाहरण के तौर पर, किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 20,000 रुपये प्रति माह है। पुरानी 15,000 रुपये की सीमा के तहत वह वैधानिक सीमा से ऊपर था और खुद ही अनिवार्य कवरेज के दायरे में नहीं आता था।
नई 25,000 रुपये की सीमा लागू होने के बाद 20,000 रुपये की बेसिक सैलरी वाला कर्मचारी अनिवार्य ईपीएफओ कवरेज में आ जाएगा। इसके साथ उसके वेतन से पीएफ योगदान शुरू होगा।
PF के साथ पेंशन और बीमा का लाभ
नई व्यवस्था का असर केवल पीएफ तक सीमित नहीं रहेगा। दायरे में आने वाले कर्मचारी को रिटायरमेंट के लिए PF जमा होने का लाभ मिलेगा।
इसके अलावा कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत पेंशन की पात्रता और कर्मचारी जमा से जुड़ी बीमा योजना (EDLI) के तहत बीमा कवर भी मिलेगा।
अक्टूबर 2026 से लागू होगी नई सीमा
EPFO की संशोधित 25,000 रुपये की सैलरी लिमिट अक्टूबर 2026 से लागू होगी। सरकार के मुताबिक, इससे 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी ईपीएफओ के दायरे में आ सकते हैं।
इस बदलाव के बाद जिन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी नई सीमा के भीतर आती है, उनके लिए पीएफ से जुड़ी सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ जाएगा।


