स्वतंत्र बोल
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रायपुर 29 अप्रैल 2025 . छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षा बलों द्वारा चलाया जा रहा सबसे बड़ा ऑपरेशन निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर स्थित कर्रेगुट्टा की दुर्गम पहाड़ियों में सुरक्षाबलों ने माओवादियों को चारों ओर से घेर लिया है। अब तक की कार्रवाई में तीन महिला नक्सलियों को ढेर कर दिया गया है और पांच शव बरामद किए जा चुके हैं।
प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस एंटी-नक्सल अभियान को लेकर अधिकारियों से जानकारी ली और रणभूमि में तैनात जवानों के साहस व संकल्प की सराहना की। उन्होंने कहा कि जवान 44 डिग्री तापमान, पानी की कमी और छांवहीन चुनौतीपूर्ण हालात में भी डटे हुए हैं, जो अत्यंत प्रशंसनीय है।
स्पेशल फोर्स और व्यापक रणनीति
नक्सली कमांडरों की मौजूदगी की खुफिया जानकारी मिलने के बाद तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ की संयुक्त फोर्स द्वारा इस विशेष ऑपरेशन की योजना बनाई गई। अभियान के लिए चुने गए युवा और प्रशिक्षित जवानों की टीम पिछले सात दिनों से दुर्गम इलाकों में डटी हुई है और लगातार चोटी की ओर बढ़ रही है।
हीटवेव बना चुनौती, 40 जवान अस्पताल में भर्ती
भीषण गर्मी इस अभियान में एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। अब तक 40 जवान हीटवेव से प्रभावित होकर एयरलिफ्ट किए जा चुके हैं और उनका इलाज जारी है। ऑपरेशन की सफलता के लिए बिहार और झारखंड से भी अतिरिक्त बल बुलाया गया है।
नक्सलियों के पास महीनेभर का राशन और पानी
सूत्रों के अनुसार नक्सलियों ने पहाड़ियों पर एक महीने का राशन जमा कर रखा है और प्राकृतिक जलस्रोतों की उपलब्धता उनके टिके रहने में मदद कर रही है। ऑपरेशन के दौरान एक गुफा भी मिली, जिसमें शिवलिंग स्थापित था, हालांकि वहां कोई नक्सली मौजूद नहीं था।
बड़े माओवादी नेता घिरे होने की संभावना
सूत्रों का दावा है कि कर्रेगुट्टा पहाड़ियों में माओवादी कमांडर हिड़मा, दामोदर, बल्ली प्रकाश, आज़ाद समेत बटालियन नंबर 1 और 2 के कई शीर्ष नेता मौजूद हैं। इनके पकड़े या मारे जाने की स्थिति में बस्तर में नक्सलवाद को करारा झटका लगेगा।
देश की निगाहें ऑपरेशन पर टिकी
यह ऑपरेशन बस्तर के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा सैन्य अभियान माना जा रहा है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जब तक नतीजे नहीं मिलते, अभियान जारी रहेगा। हर दिन माओवादियों के लिए निर्णायक साबित हो रहा है और देशभर की निगाहें इस ऐतिहासिक अभियान पर टिकी हैं।
