स्वतंत्र बोल
रायपुर 11 अक्टूबर 2026: छत्तीसगढ़ में करीब 1.5 लाख शिक्षकों की ऑनलाइन हाजिरी की जब डिजिटल मॉनिटरिंग शुरू हुई तो स्कूल शिक्षा विभाग के सामने चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। सितंबर महीने की समीक्षा रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश भर के 7 हजार से ज्यादा शिक्षकों की ऑनलाइन हाजिरी दर्ज ही नहीं हुई है। यह गंभीर स्थिति तब सामने आई है जब विभाग शिक्षकों, बाबुओं और चपरासियों तक का गैर-विभागीय अटैचमेंट पूरी तरह खत्म कर चुका है। अब शिक्षा विभाग इन 7 हजार ‘लापता’ शिक्षकों की खोजबीन में जुट गया है।
जिला शिक्षा अधिकारियों से मांगी गई लोकेशन रिपोर्ट
मामले का खुलासा होते ही स्कूल शिक्षा संचालनालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) से जवाब तलब किया है। विभाग ने डीईओ से स्पष्ट रिपोर्ट मांगी है कि ये 7 हजार शिक्षक मूल रूप से कहां पदस्थ हैं, वे इस वक्त किस जगह ड्यूटी दे रहे हैं और उनकी ऑनलाइन हाजिरी क्यों नहीं लग रही है। इससे पहले खुलासे में सामने आया था कि प्रदेश के 10 हजार से ज्यादा शिक्षक कलेक्टोरेट में जन्म प्रमाण पत्र बनाने से लेकर अफसरों के पीए और अन्य विभागों के अटैचमेंट में काम कर रहे थे।
नारायणपुर में सबसे कम 70% हाजिरी, नेटवर्क की भी समस्या
ऑनलाइन सिस्टम लागू होने के बाद अब उच्च स्तर पर अफसर एक क्लिक पर किसी भी जिले, स्कूल और शिक्षक की हाजिरी का रिकॉर्ड देख सकते हैं। सितंबर की समीक्षा में नारायणपुर जिला सबसे पीछे पाया गया, जहां रोजाना औसतन केवल 70 फीसदी शिक्षकों की ही ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज हो रही है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि नारायणपुर के कई दुर्गम गांवों में मोबाइल नेटवर्क नहीं पहुंच पाया है, इसलिए ऐसे दुर्गम इलाकों के स्कूलों को ऑफलाइन हाजिरी का विकल्प भी दिया गया है।
ऑनलाइन हाजिरी न लगाने वालों का रुकेगा वेतन
स्कूल शिक्षा संचालनालय ऐसे सभी शिक्षकों की सूची जिला शिक्षा अधिकारियों को भेज रहा है जिनकी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाई है। विभाग अब इन शिक्षकों का वेतन रोकने की पूरी तैयारी कर रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग के मुताबिक, ऑनलाइन समीक्षा में 7 हजार शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज न होने की बात सामने आई है। सभी डीईओ से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है और स्थिति स्पष्ट होते ही आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। ऑनलाइन हाजिरी न लगाने वालों का वेतन रोकने का आदेश भी जल्द जारी किया जाएगा।


