छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में स्वीकृत पदों के मुकाबले कितने जज कार्यरत? कॉलेजियम की मंजूरी के बाद बदल जाएंगे आंकड़े

Bilaspur highcourt

स्वतंत्र बोल
रायपुर 31 अक्टूबर 2026:
उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की कमी दूर करने और मुकदमों के जल्द निस्तारण के लिए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने एक अहम फैसला लिया है। कॉलेजियम ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में 6 और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में 7 नए जजों की नियुक्ति के प्रस्तावों को हरी झंडी दे दी है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की 30 अक्टूबर को हुई बैठक में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के लिए 4 अधिवक्ताओं और 2 न्यायिक अधिकारियों के नाम पर सहमति बनी। वहीं, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के लिए भी सात अधिवक्ताओं के नामों को मंजूरी दी गई है।

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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट: 4 अधिवक्ता और 2 न्यायिक अधिकारी बनेंगे जज

बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में स्वीकृत 22 पदों के मुकाबले वर्तमान में कार्यरत जजों की संख्या कम है। सितंबर 2026 में हुई नियुक्तियों के बाद यहां 14 जज कार्यरत बताए गए थे। अब कॉलेजियम की मंजूरी के बाद 6 नए जज मिलने से अदालत में लंबित मुकदमों की सुनवाई में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

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कॉलेजियम द्वारा छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के लिए मंजूर किए गए नाम इस प्रकार हैं:

  • अधिवक्ता वर्ग से (4 नाम):

    1. आनंद शुक्ला

    2. रत्न निधि पुष्टी (आर.एन. पुष्टी / रतन पुष्टी)

    3. शशांक ठाकुर

    4. सौरभ शर्मा

  • न्यायिक अधिकारी वर्ग से (2 नाम):

    1. रजनीश श्रीवास्तव

    2. बलराम प्रसाद वर्मा

इससे पूर्व 18 अगस्त 2026 की बैठक में कॉलेजियम ने तीन अन्य न्यायिक अधिकारियों—संतोष शर्मा, सुषमा सावंत और सुधीर कुमार को भी जज नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में जजों की संख्या बढ़कर होगी 45

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के लिए कॉलेजियम ने जिन सात अधिवक्ताओं के नामों को मंजूरी दी है, उनमें जबलपुर से तीन, इंदौर से दो तथा ग्वालियर और नई दिल्ली से एक-एक अधिवक्ता शामिल हैं। फिलहाल एमपी हाईकोर्ट में 38 न्यायाधीश कार्यरत हैं, और नई नियुक्तियों की आधिकारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह संख्या बढ़कर 45 हो जाएगी।

नियुक्ति की आगे की प्रक्रिया और संवैधानिक औपचारिकताएं

कॉलेजियम से सिफारिश और मंजूरी मिलने के बाद भी जजों की अंतिम नियुक्ति तुरंत नहीं होती है। इस प्रस्ताव को केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय के माध्यम से राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। संवैधानिक औपचारिकताएं और प्रक्रिया पूरी होने तथा आधिकारिक वारंट जारी होने के बाद ही सभी नए न्यायाधीश अपने पद एवं गोपनीयता की शपथ लेंगे और कार्यभार संभालेंगे।