स्वतंत्र बोल
नई दिल्ली,08 अप्रैल 2026: देश में LPG सप्लाई को लेकर केंद्र सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसने इंडस्ट्री से लेकर राज्यों तक हलचल मचा दी है। नए फॉर्मूले के तहत अब गैस की सप्लाई पहले जैसी आसान नहीं रहने वाली, बल्कि कई शर्तों और नियमों के आधार पर तय की जाएगी। यह बड़ा फैसला अंतरराष्ट्रीय हालात, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम के बाद लिया गया है।
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सरकार ने फार्मा, स्टील, फूड और एग्रीकल्चर जैसे अहम सेक्टर्स के लिए LPG सप्लाई का नया पैटर्न लागू किया है। पहले जहां उद्योगों को उनकी औसत खपत का 70% ही गैस मिल रही थी, अब इसे बदलकर 0.2 TMT (थाउजेंड मैट्रिक टन) प्रतिदिन तय कर दिया गया है। इसका सीधा असर उत्पादन और लागत पर पड़ सकता है।
वहीं राज्यों के लिए भी सरकार ने ‘रिफॉर्म-लिंक्ड’ फॉर्मूला लागू कर दिया है। केंद्र ने 70% LPG आवंटन पहले ही दे दिया है, लेकिन बाकी 30% अब राज्यों के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा। जो राज्य PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से बढ़ाएंगे और सुधारों को लागू करेंगे, उन्हें 10% अतिरिक्त गैस कोटा मिलेगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि गैस की प्राथमिकता उन उद्योगों को दी जाएगी, जहां LPG का कोई विकल्प मौजूद नहीं है। ऐसे उद्योगों को OMCs के साथ रजिस्ट्रेशन कराना होगा और PNG कनेक्शन के लिए आवेदन करना अनिवार्य होगा। हालांकि, जहां LPG का उपयोग पूरी तरह अनिवार्य है और उसे बदला नहीं जा सकता, वहां इस शर्त से छूट दी गई है।
केंद्र सरकार ने राज्यों को सख्त निर्देश भी जारी किए हैं। इसमें ‘नैचुरल गैस एंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूशन ऑर्डर 2026’ को तुरंत लागू करना, PNG और CBG (कंप्रेस्ड बायोगैस) से जुड़ी नीतियों को तेजी से लागू करना और सुधारों को प्राथमिकता देना शामिल है।
इस नए फैसले का असर कई बड़े सेक्टर्स पर पड़ने वाला है। फार्मा, फूड प्रोसेसिंग, पॉलीमर, पैकेजिंग, पेंट, स्टील, मेटल, ग्लास और केरेमिक इंडस्ट्री अब सीधे इस बदलाव की जद में आएंगे। सरकार का कहना है कि सीमित संसाधनों का सही और संतुलित उपयोग सुनिश्चित करना जरूरी है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है—क्या यह नया फॉर्मूला गैस संकट को काबू में लाएगा, या फिर इंडस्ट्री के लिए नई मुश्किलें खड़ी करेगा? आने वाले दिनों में इसका असर साफ नजर आने वाला है।
