स्वतंत्र बोल
जगदलपुर,30 अप्रैल 2026:नक्सल मोर्चे से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने माओवादी संगठन के भीतर चल रही खामोश लड़ाई को अचानक बेनकाब कर दिया है। आत्मसमर्पण कर चुके शीर्ष माओवादी नेता वेणुगोपाल देवजी को लेकर अब संगठन के अंदर खुला टकराव शुरू हो गया है। नॉर्थ कोऑर्डिनेशन कमेटी (NCC) द्वारा जारी एक प्रेस नोट ने पूरे घटनाक्रम को और ज्यादा सनसनीखेज बना दिया है।
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NCC ने अपने बयान में वेणुगोपाल देवजी पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें संगठन का “गद्दार” घोषित कर दिया है। साथ ही यह भी साफ कर दिया गया है कि आत्मसमर्पण के बाद अब उनका संगठन से कोई लेना-देना नहीं है। इस बयान के सामने आने के बाद माओवादी खेमे में हलचल तेज हो गई है और अंदरूनी संघर्ष की आहट साफ सुनाई देने लगी है।
आत्मसमर्पण के बाद फूटा गुस्सा
सूत्रों के मुताबिक, वेणुगोपाल देवजी के आत्मसमर्पण को लेकर पहले से ही संगठन के भीतर नाराजगी सुलग रही थी। हालांकि यह विवाद अब तक पर्दे के पीछे था, लेकिन NCC के इस सख्त बयान ने इसे सार्वजनिक कर दिया है। इससे यह संकेत मिल रहे हैं कि संगठन के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है।
गोरिल्ला युद्ध जारी रखने की चेतावनी
प्रेस नोट में NCC ने यह भी दोहराया है कि संगठन भले ही कमजोर पड़ा हो, लेकिन उसका अस्तित्व अभी खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने साफ कहा है कि “गोरिल्ला युद्ध” के जरिए उनकी गतिविधियां जारी रहेंगी और वे अपने आंदोलन को आगे बढ़ाते रहेंगे। इस बयान ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता भी बढ़ा दी है।
प्रतिबंध हटाने की मांग पर सख्त रुख
वेणुगोपाल देवजी द्वारा माओवादी संगठन पर लगे प्रतिबंध को हटाने की बात को भी NCC ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। संगठन ने इसे देवजी की व्यक्तिगत राय बताते हुए कहा कि यह उनकी आधिकारिक नीति का हिस्सा नहीं है।
एकता का दावा, लेकिन उठे सवाल
दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ NCC ने देवजी को गद्दार करार दिया है, वहीं दूसरी ओर संगठन के भीतर किसी भी तरह के मतभेद से इनकार करते हुए पूर्ण एकता का दावा भी किया है। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि क्या वास्तव में संगठन एकजुट है या अंदर ही अंदर बड़ी दरार पड़ चुकी है।
सियासी हलचल तेज, एजेंसियां अलर्ट
इस पूरे घटनाक्रम के बाद नक्सल मोर्चे पर सियासी हलचल भी तेज हो गई है। सुरक्षा एजेंसियां हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए हैं और आने वाले समय में हालात और बिगड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा रहा।
यह मामला अब सिर्फ एक आत्मसमर्पण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि माओवादी संगठन के भीतर पनप रही उस दरार की कहानी बनता जा रहा है, जो कभी भी बड़ा रूप ले सकती है।
