700 करोड़ का मेगा प्लान, छत्तीसगढ़ की सड़कों का बदलने वाला है चेहरा, लेकिन इन जिलों में क्यों बढ़ी हलचल

स्वतंत्र बोल
रायपुर, 09 अप्रैल 2026:
छत्तीसगढ़ में सड़क विकास को लेकर एक बड़ा और असरदार फैसला लिया गया है, जिसने कई जिलों में हलचल तेज कर दी है। लोक निर्माण विभाग ने प्रदेशभर में 15 नई फोरलेन सड़कों के निर्माण के लिए 708 करोड़ 21 लाख रुपये से अधिक की भारी-भरकम राशि मंजूर की है। इस योजना के तहत कुल 90.5 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण किया जाएगा, जिससे यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

इस फैसले के बाद जहां एक ओर लोगों को जाम और खराब सड़कों से राहत मिलने की उम्मीद है, वहीं कई क्षेत्रों में तेजी से बदलते विकास को लेकर चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं। फोरलेन सड़कों के बनने से यात्रा का समय घटेगा और सड़क सुरक्षा में भी सुधार होगा। साथ ही यह परियोजना प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति देने वाली मानी जा रही है।

दुर्ग जिले में चार प्रमुख मार्गों के लिए करोड़ों की राशि स्वीकृत की गई है, जिसमें धमधा-बेमेतरा मार्ग, स्मृति नगर से आईआईटी जेवरा सिरसा तक का मार्ग और शहर के कई अहम चौक शामिल हैं। वहीं रायगढ़ जिले में भी कई सड़कों के चौड़ीकरण और बायपास निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर बजट जारी किया गया है, जिसमें तमनार फोरलेन बायपास सबसे प्रमुख परियोजनाओं में शामिल है।

राजधानी रायपुर सहित अभनपुर और राजिम क्षेत्रों में भी सड़कों के उन्नयन का काम तेजी से होगा। अंबिकापुर, बिलासपुर और कबीरधाम जैसे जिलों में भी लंबी दूरी के फोरलेन मार्गों के निर्माण को मंजूरी दी गई है, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होगी। जशपुर जिले में भी तीन प्रमुख सड़कों को फोरलेन में बदला जाएगा, जो आसपास के इलाकों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है।

सरकार का मानना है कि यह केवल सड़क निर्माण नहीं, बल्कि विकास का बड़ा इंजन साबित होगा। बेहतर कनेक्टिविटी से कृषि, व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान होगी। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच की दूरी भी कम होगी, जिससे संतुलित विकास को बढ़ावा मिलेगा।

उप मुख्यमंत्री और लोक निर्माण मंत्री अरुण साव ने साफ कहा है कि सुरक्षित और सुगम आवागमन सरकार की प्राथमिकता है। उनका मानना है कि फोरलेन सड़कों का यह विस्तार आने वाले समय में प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देगा।

हालांकि इस बड़े ऐलान के बाद अब नजर इस बात पर टिकी है कि ये परियोजनाएं कितनी तेजी और पारदर्शिता के साथ जमीन पर उतरती हैं, क्योंकि पहले भी कई योजनाएं कागजों तक सीमित रह जाने के आरोप झेलती रही हैं। ऐसे में यह योजना विकास की नई कहानी लिखेगी या फिर सवालों के घेरे में आएगी, यह आने वाला वक्त तय करेगा।