जंगल से सड़क तक मौत का साया? 133 हाथियों का आतंक, रातों में उजड़ रहीं फसलें, दहशत में गांव

स्वतंत्र बोल
रायगढ़, 17 अप्रैल 2026:
  छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में इन दिनों हालात ऐसे बन गए हैं, जहां हर शाम के साथ डर और अनिश्चितता भी बढ़ती जा रही है। पानी और भोजन की तलाश में जंगलों से बाहर निकलकर हाथियों का विशाल दल अब गांवों और सड़कों तक पहुंच रहा है, जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल गहरा गया है।

गुरुवार शाम एक ऐसा ही खौफनाक नजारा देखने को मिला, जब करीब 10 हाथियों का झुंड अचानक सड़क किनारे आ पहुंचा। कुछ ही पलों में पूरे मार्ग पर वाहनों की आवाजाही थम गई। लोग दूर खड़े होकर सांस रोके इस इंतजार में रहे कि कब ये विशालकाय जानवर रास्ता छोड़ेंगे। हाथियों के दूसरे जंगल की ओर बढ़ने के बाद ही यातायात दोबारा शुरू हो सका।

धरमजयगढ़ वन मंडल में हाथियों की संख्या अब 133 तक पहुंच चुकी है, जो इस पूरे इलाके के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। इस दल में 31 नर, 67 मादा और 35 शावक शामिल हैं। अलग-अलग रेंज में फैले ये झुंड कभी भी गांवों की ओर रुख कर लेते हैं, जिससे खतरा और बढ़ जाता है।

छाल रेंज के बोजिया में 35, पोटिया में 30, छाल में 13, लैलूंगा के आमापाली में 13 और आमगांव में 15 हाथियों की मौजूदगी दर्ज की गई है। गुरुवार को जो झुंड सड़क पर आया, वह आमगांव के 368 आरएफ जंगल से निकलकर रायगढ़ रोड पार करते हुए 367 आरएफ जंगल की ओर बढ़ा।

मौके पर वन विभाग और हाथी मित्र दल की टीम लगातार निगरानी कर रही है। शेरवन, दर्रीडीह, ओंगना, पोटिया और खलबोरा समेत आसपास के गांवों के लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी दी गई है। बावजूद इसके, ग्रामीणों के बीच भय का माहौल कम होने का नाम नहीं ले रहा।

स्थिति और गंभीर तब हो गई जब बीती रात हाथियों के झुंड ने 14 किसानों की फसलों को बर्बाद कर दिया। खेतों में खड़ी मेहनत कुछ ही घंटों में उजड़ गई, जिससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है।

अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर कब तक ग्रामीण इस डर के साए में जीते रहेंगे और क्या इस बढ़ते खतरे से निपटने के लिए कोई स्थायी समाधान निकलेगा। फिलहाल, हर रात के साथ अनहोनी का खतरा और गहरा होता जा रहा है।