कड़े प्रतिबंधों के बीच ईरान ने भारत और चीन समेत 4 देशों को ही क्यों चुना?

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स्वतंत्र बोल
नई दिल्ली 4 नवंबर 2026:
मिडिल-ईस्ट में जारी भारी तनाव और अमेरिका-इजरायल के साथ संघर्ष के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर आई है। ईरान ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर लगाए गए प्रतिबंधों से भारत, चीन, इराक और कतर को छूट देने का ऐलान किया है।

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ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी संघर्ष के कारण इस समुद्री मार्ग से व्यापार बेहद मुश्किल हो गया था। हालांकि, ईरान के इस फैसले से भारतीय नौवहन (शिपिंग) और भारत की एनर्जी सप्लाई को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

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ईरानी संसद समिति ने की पुष्टि

ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के उपाध्यक्ष अमीर हयात मुकद्दम ने एक इंटरव्यू में इस छूट की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि यह व्यवस्था ईरान के इन चारों देशों के साथ जुड़े व्यावसायिक और रणनीतिक हितों पर आधारित है।

अमीर हयात मुकद्दम ने कहा, “हमने फिलहाल भारत, चीन, इराक और कतर को होर्मुज में ट्रांजिट पाबंदियों से मुक्त कर दिया है। इन देशों के जहाज स्वतंत्र रूप से गुजर रहे हैं और अमेरिकी भी उन्हें नहीं रोकते हैं।”

भारत और चीन को क्यों दी गई छूट?

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत को यह छूट देने के पीछे ईरान की जीवनरक्षक दवाओं की जरूरत भी एक अहम वजह है। कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और जारी युद्ध के कारण ईरान को वैश्विक बाजारों से दवाएं जुटाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। भारत का फार्मास्युटिकल क्षेत्र ईरान के लिए एक अहम सप्लायर है। ऐसे में भारतीय जहाजों को रास्ता देने से ईरान को भारत से जरूरी सामान और दवाएं हासिल करने में आसानी होगी।

वहीं, चीन के मामले में ईरान की रणनीति रणनीतिक और राजनीतिक समर्थन हासिल करने की है। चीन ऊर्जा और व्यापार के मोर्चे पर ईरान का बड़ा साझेदार है और अमेरिकी दबाव के बीच बीजिंग का राजनयिक समर्थन ईरान के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

भारत के लिए क्यों बेहद अहम है होर्मुज?

ओमान और ईरान के बीच स्थित होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक रास्ता है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। भारत के लिए यह रास्ता एक प्रमुख ‘एनर्जी लाइफलाइन’ की तरह काम करता है।

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 2026 के इस संघर्ष से पहले भारत के कच्चे तेल के कुल आयात का लगभग 45 प्रतिशत और एलपीजी आयात का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता था। इसके अलावा भारत अपनी एलएनजी (LNG) सप्लाई का बड़ा हिस्सा, खासतौर पर कतर और यूएई से, इसी रास्ते से हासिल करता है।