स्वंतत्र बोल
उज्जैन 1 नवंबर 2026: मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में दीपावली की भव्य तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस बार पंचांग की तिथियों में घट-बढ़ के कारण मंदिर में धनतेरस से लेकर गोवर्धन पूजा तक 5 दिनों तक दीपोत्सव की रौनक बनी रहेगी। इस दौरान बाबा महाकाल के दरबार को फूलों, दीपकों, रंगोली और रंग-बिरंगी बिजली की झालरों से सजाया जाएगा। इसके साथ ही पांचों दिन आरती के समय फुलझड़ियां जलाकर खुशी मनाई जाएगी।
ग्वालियर पंचांग से तय हुईं तारीखें
महाकाल मंदिर में धार्मिक आयोजनों के लिए ग्वालियर के पंचांग को विशेष महत्व दिया जाता है। तिथियों के अंतर के चलते 6 नवंबर को धनतेरस की पूजा होगी, 8 नवंबर को दीपावली मनाई जाएगी और 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा का आयोजन किया जाएगा। हालांकि तिथियों में एक-एक दिन का अंतर है, लेकिन मंदिर परिसर में पांचों दिन दिवाली का जश्न बना रहेगा।
इसके अलावा, ठंड के मौसम को देखते हुए कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा (27 अक्टूबर) से महाकाल मंदिर में 3 आरतियों का समय भी बदल गया है, जो होली तक लागू रहेगा। हालांकि भस्म आरती का समय यथावत रखा गया है।
6 नवंबर धनतेरस: बाबा को अर्पित होंगे चांदी के सिक्के
धनतेरस पर 6 नवंबर को मंदिर की पुरोहित समिति द्वारा भगवान महाकाल का विशेष पूजन किया जाएगा। इस दौरान देश, प्रदेश और उज्जैन की सुख-समृद्धि की कामना के साथ बाबा महाकाल को चांदी के सिक्के अर्पित किए जाएंगे। पुरोहित समिति के अनुसार, ग्वालियर पंचांग में 6 नवंबर को धनत्रयोदशी की पूजा का विधान है, हालांकि मंदिर के कैलेंडर में इस दिन कार्तिक कृष्ण द्वादशी दर्ज है।
8 नवंबर को सुबह 4 बजे भस्म आरती में मनेगी मुख्य दिवाली
दीपावली का मुख्य आयोजन 8 नवंबर को होगा। इस दिन रूप चौदस और दिवाली का पर्व एक साथ मनाया जाएगा। सुबह 4 बजे होने वाली भस्म आरती में दीपोत्सव होगा।
शीतकाल की शुरुआत की अनूठी परंपरा के तहत बाबा महाकाल को हल्दी, चंदन और फिर गर्म जल से स्नान कराया जाएगा। इसके बाद सोने-चांदी के आभूषणों से उनका दिव्य श्रृंगार होगा। फुलझड़ियों की रोशनी में विशेष आरती होगी और अन्नकूट का भव्य भोग लगाया जाएगा।
10 नवंबर: गोशाला में गोवर्धन और गोवंश की पूजा
दिवाली के बाद 10 नवंबर को कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा पर गोवर्धन पूजा का आयोजन किया जाएगा। ग्राम चिंतामन स्थित वैदिक शोध संस्थान की महाकालेश्वर गोशाला में गायों और गोवंश की पूजा होगी, जहां वेदपाठी बटुक वैदिक मंत्रोच्चार करेंगे। साथ ही महाकाल मंदिर के मुख्य द्वार पर भी विधि-विधान से गोवर्धन बनाकर पूजा-अर्चना की जाएगी।
इस दौरान उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 164 करोड़ रुपये की लागत से ‘कालभैरव लोक’ बनाने का काम भी तेजी से जारी है, जिसे 12 महीने में पूरा करने का लक्ष्य है।


