किसानों की मांग ₹3,358 प्रति क्विंटल, डिप्टी CM अरुण साव ने क्या कहा?

Farmers discussing paddy procure…

स्वतंत्र बोल
रायपुर 14 अक्टूबर 2026:
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी शुरू होने से पहले कीमत को लेकर विवाद तेज हो गया है। भारतीय किसान संघ ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर धान का खरीद मूल्य 3,100 रुपये से बढ़ाकर 3,358 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की है। संघ का कहना है कि केंद्र सरकार ने पिछले तीन वर्षों में धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में 258 रुपये की बढ़ोतरी की है, लेकिन राज्य सरकार ने इसका लाभ किसानों को नहीं दिया है। मांगें पूरी नहीं होने पर संघ ने 27 अक्टूबर को रायपुर में मंत्रालय घेरने की चेतावनी दी है।

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धान का भाव ₹3,358 करने की मांग क्यों?

भारतीय किसान संघ के मुताबिक, राज्य सरकार फिलहाल किसानों से 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीद रही है। संघ चाहता है कि इसमें 258 रुपये जोड़कर खरीद दर 3,358 रुपये प्रति क्विंटल की जाए।

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किसान नेताओं का कहना है कि धान की खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। खाद, बीज, डीजल, मजदूरी और सिंचाई पर पहले से ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है। ऐसे में धान की कीमत बढ़ाने की जरूरत है।

बकाया बोनस के ₹1,700 करोड़ जारी करने की मांग

किसान संघ ने कांग्रेस सरकार के समय का करीब 1,700 करोड़ रुपये का बकाया धान बोनस जारी करने की मांग भी उठाई है। संघ का कहना है कि यह किसानों का हक है और लंबे समय से लंबित है।

पत्र में किसानों के बकाया बोनस का भुगतान जल्द करने की मांग की गई है। संघ ने इसे राज्य सरकार की जिम्मेदारी बताया है।

27 अक्टूबर को मंत्रालय घेरने की चेतावनी

भारतीय किसान संघ ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर मांगें पूरी नहीं हुईं तो 27 अक्टूबर को रायपुर में मंत्रालय का घेराव किया जाएगा। संघ के मुताबिक, प्रदर्शन में प्रदेशभर से हजारों किसान शामिल होंगे।

संघ ने कहा है कि यह किसानों के हक की लड़ाई है और वे अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे।

डिप्टी CM अरुण साव ने क्या कहा?

मामले पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव का बयान भी सामने आया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार किसानों को धान की सबसे ज्यादा कीमत दे रही है और सरकार हमेशा किसानों के हित में काम कर रही है।

साव ने यह भी कहा कि सरकार धान के साथ दलहन, तिलहन और मिलेट्स को भी बढ़ावा दे रही है, ताकि किसानों की आय बढ़ सके।