स्वतंत्र बोल
जगदलपुर 10 अक्टूबर 2026: छत्तीसगढ़ के विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व में बड़ी संख्या में पर्यटक और स्थानीय लोग पहुंच रहे हैं। नक्सलवाद से मुक्ति के बाद यह पहला बस्तर दशहरा है। पर्व के दौरान 12 से अधिक पारंपरिक रस्में निभाई जा रही हैं। भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए करीब 400 पुलिस जवान तैनात किए जा रहे हैं। पुलिस 24 घंटे निगरानी कर रही है।
400 जवानों की तैनाती, CCTV से निगरानी
बस्तर दशहरा में हजारों लोगों की भीड़ को देखते हुए पुलिस सुरक्षा में कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। अधिकारियों के मुताबिक, पुलिस बल की ड्यूटी पूरे 24 घंटे लगाई जा रही है।
शहर में लगे CCTV कैमरों की मदद से कंट्रोल रूम से निगरानी की जा रही है। पुलिस का उद्देश्य पर्व के दौरान भीड़ को नियंत्रित रखना और किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचाव करना है।
रस्मों के दौरान भी तैनात रहेंगे पुलिस जवान
पुलिस अधीक्षक के मुताबिक, बस्तर दशहरा की सभी रस्मों में जवानों की तैनाती की गई है। पुलिस असामाजिक तत्वों के साथ-साथ दूसरी गतिविधियों पर भी नजर रख रही है।
पर्यटकों और स्थानीय लोगों की मदद के लिए कई स्थानों पर पुलिस सहायता केंद्र भी बनाए गए हैं। इन केंद्रों के जरिए पर्व में शामिल होने आए लोगों की समस्याओं का समाधान करने की व्यवस्था की गई है।
दूसरे राज्यों से भी पहुंच रहे पर्यटक
बस्तर दशहरा देखने के लिए दूसरे राज्यों से भी पर्यटक पहुंच रहे हैं। इसके अलावा बस्तर संभाग के सातों जिलों के ग्रामीण भी पर्व की रस्मों में शामिल हो रहे हैं। लोगों की बड़ी भागीदारी के कारण पुलिस के सामने सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और भीड़ को संभालने की चुनौती है।
75 दिनों तक चलता है बस्तर दशहरा
बस्तर दशहरा देश में सबसे लंबे समय तक चलने वाले दशहरा पर्वों में शामिल है। यह करीब 75 दिनों तक चलता है। इसकी शुरुआत 14वीं-15वीं शताब्दी में काकतीय वंश के राजाओं ने की थी।
इस पर्व का प्रमुख आकर्षण रथ है। इसकी अलग-अलग रस्मों में स्थानीय परंपराओं और संस्कृति की झलक देखने को मिलती है।


