स्वतंत्र बोल
रायपुर 5 अक्टूबर 2026 : राजधानी रायपुर के 32 थानों में पिछले 24 घंटों के भीतर अपहरण के कुल 132 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें रायपुर पुलिस कमिश्नरी में 92 और ग्रामीण रायपुर में 40 एफआईआर शामिल हैं। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मई और जून महीने में लापता हुए लोगों के न मिलने पर सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों का पालन करते हुए यह कार्रवाई की गई है। पुराने गुम इंसान की शिकायतों को अब अपहरण के प्रकरण में तब्दील कर नए सिरे से तलाश के लिए पुलिस टीमें गठित की जा रही हैं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश से बदला एफआईआर का नियम
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पहले 18 साल से कम उम्र के लापता बच्चों के मामले में ही किडनैपिंग का केस दर्ज होता था, जबकि बालिगों के लापता होने पर केवल गुम इंसान की शिकायत दर्ज की जाती थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के 5 मई से लागू निर्देशों के बाद अब लापता लोगों के मामलों में सीधे अपहरण का केस दर्ज कर गंभीरता से तलाश करने के आदेश दिए गए हैं। इसी नियम के तहत अकेले मुजगहन थाने में 16, गुढ़ियारी में 13, खमतराई में 11, उरला में 10 और टिकरापारा में 9 केस दर्ज किए गए हैं।
खमतराई पुलिस ने यूपी से पकड़े 3 किडनैपर
मामले दर्ज करने के साथ ही पुलिस की टीमों ने बरामदगी के प्रयास तेज कर दिए हैं। इसी कड़ी में खमतराई थाना पुलिस ने प्रतीक राय के अपहरण के मामले में तीन आरोपियों को उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का कहना है कि अब कागजी कार्रवाई के बजाय शुरुआती घंटों में ही केस दर्ज कर फॉलोअप जांच शुरू की जा रही है, ताकि मानव तस्करी या अपहरण जैसी गंभीर साजिशों पर समय रहते लगाम लगाई जा सके।
राज्य में अब भी 16 हजार से अधिक लोग लापता
आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में वर्ष 2021 से अप्रैल 2026 तक कुल 1,03,766 लोग लापता हुए हैं। इनमें से पुलिस ने 87,035 लोगों को सुरक्षित ढूंढ निकाला है, जबकि 16.13 प्रतिशत यानी 16,731 लोग अब भी लापता हैं। चालू वर्ष के अप्रैल महीने में चलाए गए ‘ऑपरेशन तलाश’ और ‘ऑपरेशन मुस्कान’ के तहत राज्य भर से 4,056 लोगों को ढूंढा गया, जिनमें 545 बच्चे और 3,511 महिला-पुरुष शामिल थे। बरामदगी के दौरान दुर्ग से 683, बिलासपुर से 648 और रायपुर से 426 लोगों का पता लगाया गया।
लापता बच्चियां बरामदगी के वक्त बन चुकी थीं मां
अधिवक्ता विपिन अग्रवाल ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने गुमशुदा इंसानों और विशेषकर बच्चों की खोज के लिए पुलिस की जवाबदेही तय की है। कोर्ट का स्पष्ट निर्देश है कि गुमशुदा बच्चे की शिकायत मिलते ही तत्काल एफआईआर दर्ज हो और जांच सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे। जांच के दौरान सामने आया कि पूर्व में लापता हुई कुछ नाबालिग लड़कियां जब पुलिस को बरामद हुईं, तब तक वे बालिग होकर मां बन चुकी थीं। इसी को देखते हुए अदालत ने शुरुआती घंटों में ही किडनैपिंग और ह्यूमन ट्रैफिकिंग के एंगल से तेजी से जांच करने पर जोर दिया है।


