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धर्म 25 सितम्बर 2026 : साल 2026 में पितृ पक्ष की शुरुआत 27 सितंबर से हो रही है, जो 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ समाप्त होगा. इससे पहले 26 सितंबर को पूर्णिमा का श्राद्ध किया जाएगा. पितृ पक्ष का यह समय पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने, तर्पण, पिंडदान और दान-कर्म के लिए विशेष माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन दिनों किए गए कर्मों का विशेष फल मिलता है. यही वजह है कि कई परिवार इन 16 दिनों के दौरान खान-पान से लेकर दैनिक जीवन में खास नियमों का पालन करते हैं.
खान-पान में बरती जाती है सात्विकता
पितृ पक्ष के दौरान कई परिवारों में पूरी तरह सात्विक भोजन पकाया और खाया जाता है. इस अवधि में मांसाहार, शराब और अन्य तामसिक खाद्य पदार्थों से दूर रहने की परंपरा है. इसके अलावा, कई लोग इन दिनों प्याज और लहसुन का सेवन भी पूरी तरह बंद कर देते हैं.
बाल और नाखून काटने से जुड़े नियम
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान बाल और नाखून काटने से बचने की सलाह दी जाती है. हालांकि, यह नियम हर जगह एक जैसा नहीं है. अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में इसे लेकर भिन्न मान्यताएं देखने को मिलती हैं.
घर में शांति और बुजुर्गों का सम्मान जरूरी
पितृ पक्ष को केवल कर्मकांड ही नहीं, बल्कि स्मरण और मानसिक पवित्रता का समय भी माना जाता है. इसलिए इन दिनों घर में झगड़ा, क्लेश, किसी का अपमान या अनावश्यक विवाद करने से बचना चाहिए. बुजुर्गों का सम्मान करना और जरूरतमंदों की मदद करना भी इस अवधि की मुख्य धार्मिक परंपराओं में शामिल है.
वास्तु के अनुसार कहां रखें पूर्वजों की तस्वीर?
वास्तु से जुड़ी मान्यताओं के मुताबिक, पूर्वजों की तस्वीर लगाने के लिए घर की दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम दिशा को सबसे उपयुक्त माना जाता है. हालांकि, तस्वीर रखने के नियम अलग-अलग पारिवारिक परंपराओं के आधार पर बदल सकते हैं. कई परिवारों में पूर्वजों की तस्वीर को मंदिर में देवी-देवताओं के साथ न रखकर, उनके लिए एक अलग सम्मानजनक स्थान बनाया जाता है.
तर्पण करते समय इन बातों का रखें ध्यान
तर्पण और श्राद्ध करने की विधि हर परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकती है. इसलिए इंटरनेट पर मौजूद अलग-अलग विधियों को आपस में मिलाने के बजाय, अपनी पारिवारिक परंपरा या किसी योग्य पुरोहित की सलाह के अनुसार ही श्राद्ध कर्म करना बेहतर माना जाता है.


