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धर्म डेस्क 28 अक्टूबर 2026: अहोई अष्टमी का व्रत 1 नवंबर 2026, रविवार को रखा जाएगा। यह पर्व संतान की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि की कामना के लिए मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं अहोई माता की पूजा करती हैं और संतान के कल्याण के लिए व्रत रखती हैं। इस बार अष्टमी तिथि 1 नवंबर को दोपहर 2 बजकर 51 मिनट पर शुरू होगी और 2 नवंबर को दोपहर 1 बजकर 10 मिनट पर समाप्त होगी। पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 36 मिनट से 6 बजकर 54 मिनट तक रहेगा।
अहोई अष्टमी 2026: पूजा का शुभ मुहूर्त
अहोई अष्टमी पर शाम के समय पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। महिलाएं दिनभर व्रत रखने के बाद अहोई माता की पूजा करती हैं और संतान की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करती हैं। परिवार की परंपरा के अनुसार, कई महिलाएं तारे दिखाई देने के बाद व्रत खोलती हैं।
अहोई अष्टमी 2026 के प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार हैं:
- व्रत की तारीख: 1 नवंबर 2026, रविवार
- अष्टमी तिथि शुरू: 1 नवंबर, दोपहर 2:51 बजे
- अष्टमी तिथि समाप्त: 2 नवंबर, दोपहर 1:10 बजे
- पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 5:36 बजे से 6:54 बजे तक
- पूजा की अवधि: 1 घंटा 18 मिनट
- तारे देखने का समय: शाम 6 बजे के बाद
अहोई अष्टमी का धार्मिक महत्व
अहोई अष्टमी को मां और संतान के प्रेम, विश्वास और मंगलकामना का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन अहोई माता की पूजा और व्रत करने से संतान के जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। महिलाएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य, उन्नति और उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हैं।
इस व्रत को माता पार्वती की आराधना से भी जोड़कर देखा जाता है। कई घरों में अहोई माता को देवी पार्वती का स्वरूप मानकर पूजा की जाती है। व्रत रखने वाली महिलाएं दिनभर संयम का पालन करती हैं। शाम को अहोई माता की पूजा करने के साथ व्रत कथा सुनती हैं और आरती करती हैं।
उत्तर भारत के कई हिस्सों में अहोई अष्टमी का पर्व मनाया जाता है। व्रत खोलने की परंपरा परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। कई महिलाएं शाम को तारे देखकर व्रत का पारण करती हैं।
अहोई अष्टमी की पूजा सामग्री
अहोई अष्टमी की पूजा के लिए कुछ जरूरी सामग्री पहले से तैयार रख सकती हैं। इसमें अहोई माता का चित्र या दीवार पर बनाया गया पारंपरिक चित्र, रोली, अक्षत, फूल, दीपक, घी, धूप, जल से भरा कलश, फल, मिठाई और पूजा की थाली शामिल हैं।
कुछ परिवारों में स्याहू और उसके बच्चों का चित्र बनाने की भी परंपरा है। पूजा की सामग्री परिवार की रीति-रिवाज के अनुसार रखी जा सकती है।
अहोई अष्टमी 2026 की पूजा विधि
- सुबह स्नान करके साफ-सुथरे कपड़े पहनें और संतान के कल्याण की कामना के साथ व्रत का संकल्प लें।
- शाम को घर के मंदिर या किसी साफ स्थान पर अहोई माता का चित्र स्थापित करें।
- दीपक जलाएं और माता को रोली, अक्षत, फूल तथा अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें।
- अहोई माता का ध्यान करते हुए संतान की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुखी जीवन की प्रार्थना करें।
- इसके बाद अहोई अष्टमी की व्रत कथा पढ़ें या परिवार के किसी सदस्य से सुनें।
- कथा के बाद माता की आरती करें और प्रसाद अर्पित करें।
- शाम को तारे दिखाई देने पर अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार तारों को जल अर्पित करें और संतान की खुशहाली की कामना करें।
- इसके बाद अपनी परंपरा के अनुसार व्रत का पारण करें।
अहोई अष्टमी पर पूजा करते समय अपने परिवार की परंपराओं का पालन करें। व्रत और पूजा से जुड़े रीति-रिवाज अलग-अलग परिवारों में भिन्न हो सकते हैं।


