क्या ‘अनारक्षित’ सिर्फ सामान्य के लिए है? छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले ने उड़ा दी सबकी नींद!

Bilaspur highcourt

स्वतंत्र बोल
बिलासपुर 22 सितम्बर 2026 :
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनुसूचित जनजाति वर्ग के कर्मचारी को पदोन्नति प्रक्रिया में शामिल करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि अनारक्षित पद किसी एक सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित नहीं होता। यदि आरक्षित वर्ग का कर्मचारी वरिष्ठता और योग्यता के आधार पर अनारक्षित पद के लिए पात्र है, तो उसके नाम पर भी विचार किया जाना चाहिए। मामले में कोर्ट ने विभागीय पदोन्नति समिति यानी डीपीसी की समीक्षा कराने और 90 दिन के भीतर नए सिरे से प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है।

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2016 में पदोन्नति से कर दिया गया था वंचित

मामला रायपुर के काशीराम नगर निवासी 53 वर्षीय अलख राम ध्रुव से जुड़ा है। वे स्कूल शिक्षा विभाग के लोक शिक्षण संचालनालय में सहायक ग्रेड-एक के पद पर कार्यरत थे। वे अनुसूचित जनजाति वर्ग से आते हैं। वर्ष 2016 में सहायक अधीक्षक पद पर पदोन्नति के लिए डीपीसी आयोजित की गई थी। इस दौरान अलख राम ध्रुव को पदोन्नति प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

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दो पद थे, एक अनारक्षित और दूसरा एससी वर्ग के लिए

वर्ष 2016 में डीपीसी के समय सहायक अधीक्षक के दो पद उपलब्ध थे। इनमें एक पद अनारक्षित था, जबकि दूसरा अनुसूचित जाति वर्ग के लिए था। याचिकाकर्ता का कहना था कि वे वरिष्ठ होने के बावजूद केवल इस आधार पर पदोन्नति प्रक्रिया से बाहर कर दिए गए कि अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए कोई रिक्त पद उपलब्ध नहीं था। वहीं डीपीसी में उनसे कनिष्ठ कर्मचारियों के नामों पर विचार किया गया।

कनिष्ठ कर्मचारियों के नाम पर विचार का भी मामला

वरिष्ठता सूची में अलख राम ध्रुव कर्मचारी सुनील कुमार भूमरकर और शैलेश शर्मा से वरिष्ठ थे। इसके बावजूद सहायक अधीक्षक पद के लिए दोनों के नामों पर विचार किया गया। राज्य की ओर से सरकारी अधिवक्ता अखिलेश कुमार ने याचिका का विरोध किया। उनका कहना था कि अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए कोई रिक्त पद उपलब्ध नहीं था। वर्ष 2016 में उपलब्ध दोनों पद आरक्षण रोस्टर के अनुसार भरे गए और पदोन्नति की प्रक्रिया नियमों के मुताबिक पूरी की गई।

हाईकोर्ट ने 90 दिन में प्रक्रिया पूरी करने कहा

मामले की सुनवाई जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की पीठ ने की। कोर्ट ने विभागीय पदोन्नति समिति की समीक्षा आयोजित करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि अलख राम ध्रुव के नाम पर सहायक अधीक्षक पद पर पदोन्नति के लिए नए सिरे से विचार किया जाए। इसके साथ ही पूरी प्रक्रिया 90 दिन के भीतर पूरी करने का आदेश दिया गया है।