रावतपुरा सरकार यूनिवर्सिटी में परीक्षा के बीच हंगामा, रजिस्ट्रार और NSUI नेताओं के बीच नारेबाजी; छात्रों को मिली बड़ी राहत

स्वतंत्र बोल 
रायपुर,11 जून 2026: श्री रावतपुरा सरकार विश्वविद्यालय में बी.एड. छात्रों से कथित रूप से 75 प्रतिशत उपस्थिति पूरी नहीं होने पर 60 हजार रुपये लेकर परीक्षा में शामिल किए जाने के विरोध में गुरुवार को बड़ा बवाल देखने को मिला। रायपुर जिला NSUI और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर चक्काजाम कर दिया, जिससे परिसर में घंटों तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।

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प्रदर्शन के दौरान एक ओर परीक्षा प्रक्रिया चल रही थी तो दूसरी ओर NSUI कार्यकर्ता और छात्र विश्वविद्यालय गेट पर डटे रहे। इस दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन और NSUI नेताओं के बीच जमकर नारेबाजी हुई। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कम उपस्थिति वाले छात्रों को परीक्षा में शामिल करने के नाम पर भारी-भरकम राशि वसूली जा रही है, जो शिक्षा के अधिकार और छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय है।

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छात्रों का कहना था कि 60 हजार रुपये जैसी बड़ी रकम जमा करने का दबाव आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों पर अतिरिक्त बोझ डाल रहा है। इसी मांग को लेकर NSUI ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और कथित वसूली बंद करने की मांग की।

करीब पांच घंटे तक चले प्रदर्शन के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच सहमति बनी। प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने फाइन की राशि में कटौती करने का निर्णय लिया, जिसके बाद आंदोलन समाप्त हुआ।

रायपुर जिला NSUI अध्यक्ष प्रशांत गोस्वामी ने कहा कि शिक्षा संस्थानों में छात्रों से इस तरह की भारी रकम वसूलना गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि यदि किसी छात्र की उपस्थिति कम है तो उसके लिए निर्धारित नियम और प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन इतनी बड़ी राशि लेकर परीक्षा में बैठाने का मामला जांच का विषय है। उन्होंने दावा किया कि यह छात्रों और NSUI की बड़ी जीत है।

प्रदर्शन के दौरान एक और महत्वपूर्ण मांग भी उठाई गई। NSUI ने कहा कि आंदोलन में शामिल होने के कारण जो छात्र-छात्राएं परीक्षा से वंचित रह गए हैं, उनके लिए विशेष परीक्षा आयोजित की जाए। इस मांग पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने सहमति जताई और बताया गया कि प्रभावित विद्यार्थियों के लिए दो दिन बाद विशेष परीक्षा आयोजित की जाएगी।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद विश्वविद्यालय परिसर में दिनभर चर्चाओं का माहौल बना रहा। छात्रों का कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य केवल आर्थिक राहत दिलाना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकना भी है। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस मामले में आधिकारिक विस्तृत बयान का इंतजार किया जा रहा है।