स्वतंत्र बोल
बिलासपुर 08 जून 2026: मुंगेली के बहुचर्चित गैंगरेप मामले में मुख्य आरोपी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। मानसिक रूप से अस्वस्थ युवती से सामूहिक दुष्कर्म और घटना का अश्लील वीडियो बनाने के आरोपों से घिरे मुख्य आरोपी जलेश रात्रे की जमानत याचिका सर्वोच्च न्यायालय ने खारिज कर दी है। इसके साथ ही आरोपी की जेल से बाहर आने की उम्मीदों पर फिलहाल पूरी तरह विराम लग गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट के आदेश को सही ठहराते हुए उसमें हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि इस स्तर पर राहत देने का कोई आधार नहीं बनता।
तालाब से उठाकर सुनसान जगह ले जाने का आरोप
मामला मुंगेली जिले के जरहागांव थाना क्षेत्र का है। आरोप है कि 19 दिसंबर 2024 की शाम 22 वर्षीय मानसिक रूप से अस्वस्थ युवती नहाने के लिए तालाब गई थी। इसी दौरान आरोपी और उसके साथियों ने उसे जबरन मोटरसाइकिल पर बैठाया और सुनसान स्थान पर ले गए।
पीड़िता के साथ सामूहिक दुष्कर्म किए जाने का आरोप है। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि घटना का वीडियो भी बनाया गया था।
मोबाइल से मिला था अहम वीडियो
पुलिस जांच में मिले तथ्यों के अनुसार घटना से जुड़ा वीडियो गांव के लोगों के माध्यम से सामने आया था। बताया गया कि आरोपियों के मोबाइल फोन से वीडियो बरामद होने के बाद उसे पुलिस को सौंपा गया था। यही वीडियो बाद में जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बना।
मामले के उजागर होने के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की थी।
खुद को निर्दोष बताकर मांगी थी जमानत
मुख्य आरोपी जलेश रात्रे ने अदालत में खुद को निर्दोष बताते हुए दूसरी जमानत याचिका दायर की थी। बचाव पक्ष का दावा था कि घटना के समय वह पेट्रोल लेने गया हुआ था और वारदात में उसकी कोई भूमिका नहीं थी।
हालांकि राज्य शासन की ओर से अदालत में एफएसएल रिपोर्ट, जांच में मिले डिजिटल साक्ष्य और पीड़िता की मानसिक स्थिति का हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया गया।
पहले हाई कोर्ट, अब सुप्रीम कोर्ट से भी झटका
मामले की गंभीरता को देखते हुए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 3 फरवरी 2026 को आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने मोबाइल से मिले वीडियो और अन्य साक्ष्यों को महत्वपूर्ण मानते हुए राहत देने से इनकार कर दिया था।
इसके बाद आरोपी ने हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सर्वोच्च न्यायालय ने देरी माफी आवेदन स्वीकार कर मामले की सुनवाई तो की, लेकिन हाई कोर्ट के आदेश को विधिसम्मत मानते हुए विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी।
आरोपी को नहीं मिली कोई राहत
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद मुख्य आरोपी को किसी प्रकार की कानूनी राहत नहीं मिल सकी है। अब मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया निचली अदालत में जारी रहेगी।
बहुचर्चित इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पीड़ित पक्ष के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जबकि आरोपी के लिए यह बड़ा कानूनी झटका साबित हुआ है।


