शराब माफिया से ‘सेटिंग’ का आरोप! छापे के दौरान कोचिया से एकांत में हुई बातचीत, थाना प्रभारी सस्पेंड

स्वतंत्र बोल
रायपुर/अभनपुर 30 मई 2026:  रायपुर ग्रामीण पुलिस महकमे में उस समय हड़कंप मच गया जब गोबरा नवापारा थाना प्रभारी दीपेश जायसवाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। उन पर अवैध शराब कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण नहीं कर पाने और कार्रवाई के दौरान संदिग्ध आचरण प्रदर्शित करने के आरोप लगे हैं।

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पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा द्वारा जारी आदेश के बाद यह कार्रवाई पूरे पुलिस विभाग में चर्चा का विषय बन गई है।

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लंबे समय से मिल रही थीं शिकायतें

जानकारी के अनुसार, गोबरा नवापारा थाना क्षेत्र में काफी समय से अवैध शराब बिक्री की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं। वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से थाना प्रभारी को कई बार कार्रवाई और नियंत्रण के निर्देश भी दिए गए थे, लेकिन इसके बावजूद क्षेत्र में अवैध शराब का कारोबार जारी रहने की शिकायतें मिलती रहीं।

छापे के दौरान बढ़ा मामला

मामला उस समय गंभीर हो गया जब एसीसीयू रायपुर की देहात टीम ने 29 मई को गोबरा नवापारा क्षेत्र में लल्ला सोनवानी के ठिकाने पर छापामार कार्रवाई की। टीम को मौके पर अवैध शराब बिक्री से जुड़े तथ्य मिले।

सूत्रों के अनुसार, कार्रवाई की जानकारी मिलने पर थाना प्रभारी दीपेश जायसवाल भी मौके पर पहुंचे। इसी दौरान उनकी भूमिका को लेकर सवाल खड़े हो गए।

आरोपी से एकांत में बातचीत पर उठे सवाल

आरोप है कि कार्रवाई के दौरान थाना प्रभारी ने आरोपी लल्ला सोनवानी से अलग जाकर बातचीत की। इस कथित बातचीत और उनके व्यवहार को लेकर अधिकारियों ने गंभीर आपत्ति जताई। विभागीय स्तर पर इसे संदिग्ध और अनुशासनहीन आचरण माना गया।

यही नहीं, अधिकारियों का मानना है कि क्षेत्र में अवैध शराब कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में भी थाना प्रभारी असफल रहे।

एसपी ने लिया सख्त फैसला

पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा ने तत्काल प्रभाव से दीपेश जायसवाल को निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें पुलिस अधीक्षक कार्यालय, रायपुर (ग्रामीण) से संबद्ध किया गया है।

विभाग में बना चर्चा का विषय

एक ओर पुलिस अवैध शराब कारोबार के खिलाफ लगातार अभियान चला रही है, वहीं थाना प्रभारी पर लगे ऐसे आरोपों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब इस मामले में आगे विभागीय जांच भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि कार्रवाई के दौरान वास्तव में क्या हुआ था।

फिलहाल निलंबन की इस कार्रवाई ने साफ संकेत दे दिया है कि अवैध कारोबार से जुड़े मामलों में लापरवाही या संदिग्ध भूमिका पाए जाने पर विभाग सख्त रुख अपनाने के मूड में है।