साय कैबिनेट के 3 बड़े फैसले! अब सरकारी कबाड़ से होगी करोड़ों की कमाई, सड़क ठेकेदारों को भी मिली बड़ी राहत

रायपुर। मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय महानदी भवन में हुई कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसलों पर मुहर लगी। इन निर्णयों का सीधा असर सरकारी व्यवस्था, सड़क निर्माण और प्रशासनिक सिस्टम पर पड़ने वाला है। खास बात यह रही कि सरकार ने जहां सरकारी विभागों में जमा कबाड़ और अनुपयोगी सामान को लेकर बड़ा फैसला लिया, वहीं सड़क निर्माण कार्यों में आ रही रुकावट को दूर करने के लिए ठेकेदारों को राहत देने का भी निर्णय किया गया।

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कैबिनेट ने राज्य के विभिन्न विभागों, निगमों, मंडलों और स्थानीय निकायों में जमा स्क्रैप और अनुपयोगी सामग्रियों के निस्तारण के लिए भारत सरकार के उपक्रम Metal Scrap Trade Corporation Limited यानी MSTC के साथ सेलिंग एजेंसी अनुबंध की अवधि अगले तीन वर्षों के लिए बढ़ाने को मंजूरी दे दी। यह अनुबंध वर्ष 2019 से लागू था और 31 मई 2026 को समाप्त होने वाला था।

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सरकार का मानना है कि MSTC के ई-ऑक्शन प्लेटफॉर्म से अब देशभर के खरीदार ऑनलाइन बोली लगाकर स्क्रैप खरीद सकेंगे, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी और राज्य को बेहतर राजस्व मिलेगा। इससे विभागों को अलग-अलग टेंडर और विज्ञापन प्रक्रिया से भी राहत मिलेगी। साथ ही सरकारी परिसरों में लंबे समय से जमा कबाड़ हटने से साफ-सफाई और जगह प्रबंधन भी बेहतर हो सकेगा।

बैठक में एक और बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल को सामान्य प्रशासन विभाग के अधीन लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसके लिए “छत्तीसगढ़ शासन कार्य (आवंटन) नियम” में संशोधन किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे भर्ती प्रक्रिया को और व्यवस्थित और केंद्रीकृत बनाने में मदद मिलेगी।

इधर सड़क निर्माण से जुड़े फैसले ने ठेकेदारों और निर्माण एजेंसियों को बड़ी राहत दी है। कैबिनेट ने 1 अप्रैल 2026 के बाद बिटुमिन यानी डामर की कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरी को देखते हुए अनुबंधित ठेकेदारों को सीमित और आंशिक मूल्य राहत देने का निर्णय लिया है। यह राहत 1 अप्रैल से 30 जून 2026 की अवधि के लिए लागू रहेगी।

सरकार के मुताबिक वैश्विक हालात और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में तेजी के कारण सड़क निर्माण कार्य प्रभावित होने लगे थे। ऐसे में निर्माण कार्यों की गति धीमी पड़ने का खतरा था। इसी वजह से सरकार ने यह फैसला लिया ताकि सड़क निर्माण और मरम्मत के काम समय पर पूरे हो सकें और विकास कार्यों की रफ्तार बनी रहे।

कैबिनेट के इन फैसलों को सरकार प्रशासनिक सुधार, पारदर्शिता और विकास कार्यों को गति देने की दिशा में बड़ा कदम मान रही है।