राजस्व अधिकारियो की पोस्टिंग में भूमाफिया की भूमिका, मठ-मंदिरो की जमीन भी बेच डाला.. अविनाश बिल्डकॉन के करोडो फंसे !

स्वतंत्र बोल
रायपुर 29 अप्रैल 2025.  भारतमाला परियोजना में मुआवजा घोटाले में गिरफ्तार हुए आरोपियों ने रायपुर महासमुंद और धमतरी जिले में अनेको सरकारी और गैर सरकारी जमीनों में गड़बड़ी की है। आरोपितों के गिरफ्तारी के बाद दर्जनों मामले सामने आ रहे है। राजधानी के धरमपुरा, दतरेंगा, पंडरी में इसी तरह गड़बड़ी कर जमीनों पर कब्ज़ा कर बेचा गया है। बताते है कि इस गिरोह में जमीनों के पेपर्स तैयार करने से लेकर ग्राहक खोजने तक एक संगठित गिरोह काम करता है, जिसमे आधा दर्जन जमीन दलाल, वकील और राजस्व अधिकारी शामिल है। आर्थिक रूप से ताकतवर जमीन दलाल अपने मनमाफिक पटवारी से लेकर तहसीलदार और एसडीएम की पोस्टिंग कराता था, जिसके बाद धड़ल्ले से फर्जीवाड़ा का खेल चलता था।

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चर्चाओ के अनुसार हरमीत खनूजा का रायपुर और महासमुंद जिले के एसडीएम और तहसील कार्यालयों में सीधा दखल था। राजस्व अधिकारियो का जमावड़ा उसके तेलीबांधा स्थित ऑफिस में होता था, जिसे कुछ दिनों पहले ईओडब्ल्यू ने सील किया है। भारत माला प्रोजेक्ट में गिरफ्तार जमीन दलाल हरमीत खनूजा और विजय जैन की दर्जनों शिकायते रही पर पूर्व में रसूख के चलते कार्यवाही नहीं हुई। कुछ महीने पहले खनूजा पर भगवान् रामचंद्र स्वामी जैतूसाव मठ के धरमपुरा स्थित जमीनों को फर्जीवाड़ा कर बेचने का आरोप लगा था। धरमपुरा के जमीन को जामगांव बी के किसान सोनूराम साहू और सोनसाय साहू के नाम बेचा गया। बाद में सोनू साहू और सोनसाय साहू ने उसी जमीन खसरा क्रमांक 298/1 को गायत्री प्रोजेक्ट के मुकेश शाही, हरमीत खनूजा, आदित्य रियल वेंचर के आनंद कामदार को बेच दिया। इस घोटाले में पेटीलाइन गोलबाजार के कारोबारी विजय जैन पर फर्जी किसानो को सौदा के लिए तैयार करने का आरोप है।

मठ की जमीन बेच डाला-

जैतूसाव मठ के दतरेंगा स्थित जमीन की खरीदी बिक्री में अप्रत्यक्ष रूप से हरमीत खनूजा और विजय जैन का नाम सामने आया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार उमा तिवारी जैसी कहानी दतरेंगा के जमीनों को बेचने में गढ़ी गई है। दतरेंगा में मृत किसान कार्तिक राम के बेटे और बेटियों के रूप में किसानो को आगे कर फर्जी विक्रय विलेख के सहारे मठ की जमीन का 1972 के बाद साल 2023 में नामान्तरण कराया। मठ प्रबंधन के आपत्ति के बाद भी अधिकारियो ने हरमीत के प्रभाव के चलते नामांतरण पर रोक नहीं लगाया। बताते है कि इसमें किसान को कुछ पैसे देकर बाकी पैसे हरमीत खनूजा, विजय जैन, श्याम, तत्कालीन तहसीलदार, एसडीएम और उनके संगठित गिरोह डकार गए। मठ प्रबंधन को पक्के में 62 लाख रुपये दिया गया, जिसके बाद मठ प्रबंधन ने अपनी सभी आपत्तियों को वापस ले लिया था। जमीन बेचने वाले किसान परिवार ने कुछ पैसा नोटरी कर हरमीत खनूजा को लौटाया है, जिसकी कॉपी स्वतंत्र बोल के पास मौजूद है। इस जमीन की अनुमति संबंधी दस्तावेज पंजीयक सार्वजानिक न्यास के कार्यालय में नहीं है।

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बिल्डर की भूमिका-

दतरेंगा स्थित जैतूसाव मठ की जमीन पर कब्ज़ा रोकने में मठ के जिम्मेदारों ने गंभीरता नहीं दिखाया। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार अविनाश बिल्डकॉन के अरुण सिंघानिया ने मठ के जिम्मेदारों के साथ समझौता कराया जिसके बाद मठ प्रबंधन की बैठक वरिष्ठ कांग्रेस नेता और ट्रस्ट के कथित उपाध्यक्ष सत्यनारायण शर्मा के आनंदनम स्थित आवास में 24 अक्टूबर 2024 में हुआ था। बताते है कि ट्रस्ट के कुछ सदस्य समझौता करने के पक्ष में नहीं थे बाद में अज्ञात शक्ति के दबाव में सबने सहमति जताते हुए प्रस्ताव पारित कर दिया।

 

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