स्वतंत्र बोल
रायपुर 15 जनवरी 2025:छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 2000 करोड़ के शराब घोटाला मामले (Chhattisgarh liquor scam) में प्रवर्तन निदेशालय (ED) आज तीसरी बार पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा और बेटे हरीश लखमा को पूछताछ के लिए बुलाया. इस दौरान ED ने कवासी लखमा को गिरफ्तार कर जस्टिस अतुल श्रीवास्तव की कोर्ट में पेश किया गया है. ईडी ने कोर्ट से लखमा की 14 दिन की रिमांड मांगी. मामले में दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद कवासी लखमा को 7 दिन की रिमांड में भेज दिया है.
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ईडी के वकील सौरभ कुमार पांडे का बयान
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छत्तीसगढ़ में हुए शराब घोटाले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को गिरफ्तार किया है. कवासी लखमा को प्रति महीना दो करोड़ रुपये के हिसाब से 72 करोड़ रुपए के लेनदेन सामने आया है. इनके अलावा आबकारी अधिकारी इकबाल और जयन देवांगन के साथ कन्हैया लाल कुर्रे जो पैसे ले जाकर इनके पास छोड़ता था. साथ ही साथ जग्गू राजू के पास से कई सबूत सामने आए है. इन पैसों से दो काम में उपयोग किया गया है. इनके सपूत का सुखमा में घर के निर्माण में और सुखमा कांग्रेस भवन के निर्माण में किया गया है. बड़ी मात्र में नगद लेनदेन सामने आए है. इनका खुद का कथन है कि अरुणपति त्रिपाठी इनसे दस्तखत कराता था. इन सब चीजे जोड़कर जांच की जा रही है. ईडी रिमांड पर कई बिंदुओं पर पूछताछ की जाएगी. पूर्व में भी हुए पूछताछ में जो भी तथ्य सामने आए हैं. उन सभी चीजों को जोड़ा जाएगा.

बचाव पक्ष के वकील फैजल रिज़वी का बयान
कॉंग्रेस के वर्तमान विधायक है. पीएमएलए के प्रकरण पर कई लोगों को गिरफ्तार किया गया. कवासी लखमा को जब-जब बुलाया गया था, आज से दो वर्ष पहले भी, अभी पिछले माह भी बुलाया गया था. इन्हें सिर्फ दो बार सम्मन दिया गया है. कवासी लखमा पूरे विवेचना का सहयोग करते हुए जांच कार्रवाई में काम कर रहे थे. ईडी ने कवासी लखमा से जब-जब पूछा घर निर्माण के संबंध में तब कवासी लखमा ने बताया की घर बनाने के लिए 80 लाख रुपये लोन लिया था, 15 लाख रुपये अपने जमा पूंजी और 10 लाख रुपये अपने बेटे से लिया था. इस वक्त मेरे पास 20 हज़ार रुपये भी नहीं है. बस्तर का विधायक हूं और बस्तर के लिए लड़ता रहूंगा. उन्होंने कहा कि ईडी के पास कवासी लखमा के खिलाफ कोई सबूत नहीं है, सिर्फ द्वेषपूर्वक सबूत बनाए जा रहे हैं, ऐसा कवासी लखमा का कहना है.

बता दें कि शराब घोटाला मामले में 28 दिसंबर को ED ने पूर्व मंत्री लखमा और उनके बेटे हरीश लखमा के ठिकानों पर छापेमार कार्रवाई की थी. छापेमार कार्रवाई में ED ने नगद लेनदेन के सबूत मिलने की जानकारी दी थी. 3 जनवरी को दोनों को पूछताछ के बाद छोड़ा गया था.
क्या है छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला ?
दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में 11 मई, 2022 को आयकर विभाग ने पूर्व IAS अनिल टुटेजा, उनके बेटे यश टुटेजा और सौम्या चौरसिया के खिलाफ याचिका दायर की थी. जिसमें बताया गया था कि छत्तीसगढ़ में रिश्वत, अवैध दलाली के बेहिसाब पैसे का खेल चल रहा है. महापौर ऐजाज ढेबर का भाई अनवर ढेबर का भाई अवैध वसूली के खेल में शामिल है. जिसके बाद ईडी ने 18 नवंबर, 2022 को PMLA Act के तहत मामला दर्ज किया. अबतक मामले में 2161 करोड़ के घोटाले की बात का कोर्ट में पेश चार्जशीट में जिक्र किया है.
ईडी की चार्जशीट के अनुसार, साल 2017 में आबकारी नीति में संशोधन कर CSMCL के ज़रिये शराब बेचने का प्रावधान किया गया, लेकिन 2019 के बाद शराब घोटाले के किंगपिन अनवर ढेबर ने अरुणपति त्रिपाठी को CSMCL का MD नियुक्त कराया, उसके बाद अधिकारी, कारोबारी, राजनैतिक रसूख वाले लोगों के सिंडिकेट के ज़रिये भ्रष्टाचार किया गया, जिससे 2161 करोड़ का घोटाला हुआ. CSMCL के MD रहे अरुणपति त्रिपाठी मनपसंद डिस्टिलर की शराब को परमिट करते थे. देशी शराब के एक केस पर 75 रुपये कमीशन दिया जाना था, इस कमीशन की त्रिपाठी एक्सेलशीट तैयार कर अनवर ढेबर को भेजते थे . आरोप है कि अनवर ढेबर और अरुणपति त्रिपाठी के सिंडिकेट ने नकली होलोग्राम लगाकर अवैध तरीके से शराब की बेधड़क बिक्री की. इससे राज्य के राजस्व को बड़ा नुकसान हुआ. आपराधिक सिंडिकेट के जरिये CSMCL की दुकानों में सिर्फ तीन ग्रुप की शराब बेची जाती थीं, जिनमें केडिया ग्रुप की शराब 52 प्रतिशत, भाटिया ग्रुप की 30 प्रतिशत और वेलकम ग्रुप की 18 प्रतिशत हिस्सा शामिल है.
