स्वतंत्र बोल
नई दिल्ली 18 मार्च 2025:अगर आपसे पूछा जाए कि दुनिया का सबसे लंबा इंटरनेशनल बॉर्डर किन दो देशों के बीच है, तो आपका जवाब कनाडा और अमेरिका होगा. ये दोनों देश एक-दूसरे से सबसे लंबी अंतरराष्ट्रीय शेयर करते हैं.
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लेकिन धरती पर सबसे छोटा इंटरनेशनल बॉर्डर कौन सा है? यह किन दो देशों के बीच है? तो बहुत कम लोगों को इसका जवाब पता होगा. ऐसे में आपको बता दें कि दुनिया की सबसे छोटी सीमा केवल 85 मीटर की है, जो स्पेन और मोरक्को को जोड़ती है. आपको जानकर हैरानी होगी, लेकिन यह एक छोटी चट्टान से जुड़ी है. इस चट्टान का नाम पेनोन दे वेलेज दे ला गोमेरा है, जो उत्तरी अफ्रीका में है. यह चट्टान बहुत खास है, क्योंकि यह दुनिया की सबसे छोटी राष्ट्रीय सीमा का हिस्सा है. इस चट्टान का क्षेत्रफल करीब 19,000 वर्ग मीटर है. सन 1564 में स्पेन के एक सेनापति पेड्रो दे एस्टोपिनन ने इस पर कब्जा किया था, तब से यह स्पेन का हिस्सा है.
मोरक्को ने कई बार इसे अपना बताया, लेकिन स्पेन ने कभी इसे छोड़ा नहीं. वहां स्पेन के सैनिक रहते हैं जो इसकी रक्षा करते हैं. बता दें कि स्पेन का जमीनी बॉर्डर करीब 2000 किलोमीटर लंबा है. यह अंतरराष्ट्रीय सीमा पुर्तगाल और फ्रांस से लगती है. लेकिन स्पेन के पास कई देशों से जुड़ी हुई छोटी सीमाएं भी हैं, जैसे अंडोरा, जिब्राल्टर (यूनाइटेड किंगडम) और मोरक्को के साथ. इनमें से मोरक्को के साथ 85 मीटर की सीमा सबसे छोटी है.
यह सीमा पेनोन दे वेलेज को मोरक्को के तट से जोड़ती है. यह चट्टान स्पेन के उन खास इलाकों में से एक है, जो उत्तरी अफ्रीका में हैं. इनमें सेउटा, मेलिला, पेनोन दे अल्हुसेमास, चफारिनास द्वीप और इस्ला दे पेरेजिल भी शामिल हैं. यह स्पेन के अधीन हैं, लेकिन इन्हें पूरा देश नहीं माना जाता. पहले यह चट्टान एक आइलैंड था. सन 1934 में एक भूकंप आया और उसने एक छोटा रास्ता बना दिया, जिसके बाद यह द्वीप एक प्रायद्वीप बन गया. तब से यह 85 मीटर की सीमा दुनिया की सबसे छोटी सीमा कहलाती है.

इस जगह पर अब सिर्फ स्पेन के सैनिक रहते हैं. वे उसकी निगरानी करते हैं और हर महीने उनकी टुकड़ी बदलती है. आपको जानकर हैरानी होगी, लेकिन बता दें कि वहां पानी और बिजली भी नहीं है. ऐसे में स्पेन की नौसेना जहाजों से सैनिकों के लिए सामान लाती है. अक्सर मोरक्को इस पर दावा करता है. सन 2012 में तो कुछ लोग इस छोटे पहाड़ पर चढ़ गए, जो सेउटा और मेलिला को आजाद करने वाली एक कमेटी से थे. उन्होंने स्पेन का झंडा हटाकर मोरक्को का झंडा लगा दिया. यह सब कुछ मिनटों तक चला. स्पेन के सैनिकों ने झट से मोरक्को का झंडा हटाया और उन लोगों को पकड़ लिया. तब इसे एक छोटा आक्रमण माना गया. यह आखिरी बार था जब इस चट्टान पर कोई बाहर से आया. पेनोन दे वेलेज भले ही छोटी और सुनसान जगह हो, लेकिन स्पेन इसे मोरक्को को नहीं सौंपना चाहता, जबकि यह उसके जमीनी बॉर्डर से काफी दूर है.
