441 सेवाएं एक प्लेटफॉर्म पर, AI और व्हाट्सएप से बदली व्यवस्था, क्या अब पूरी तरह खत्म हो जाएगी दफ्तरों की दौड़?


रायपुर, 29 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक व्यवस्था को पूरी तरह बदल देने वाली एक नई डिजिटल पहल ने दस्तक दे दी है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने नवा रायपुर स्थित मंत्रालय महानदी भवन से ‘सेवा सेतु’ पोर्टल का शुभारंभ किया, जिसे ई-डिस्ट्रिक्ट परियोजना के उन्नत संस्करण के रूप में पेश किया गया है। इस प्लेटफॉर्म को लेकर सरकार का दावा है कि अब नागरिकों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि सैकड़ों सेवाएं सीधे उनके हाथों तक पहुंचेंगी।

इस मौके पर उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव और श्री विजय शर्मा सहित मंत्रिमंडल के कई सदस्य मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए सुशासन को नई ताकत मिलेगी और यह प्लेटफॉर्म पारदर्शिता को भी मजबूत करेगा।

‘सेवा सेतु’ को एक “वन स्टॉप सॉल्यूशन” के रूप में तैयार किया गया है, जहां 441 शासकीय सेवाएं एक ही पोर्टल पर उपलब्ध होंगी। इसमें 54 नई सेवाएं और 329 री-डायरेक्ट सेवाएं शामिल हैं। खास बात यह है कि अब व्हाट्सएप के जरिए भी नागरिक सेवाओं की जानकारी ले सकेंगे, आवेदन कर सकेंगे और डिजिटल प्रमाण-पत्र प्राप्त कर सकेंगे। अब तक 3.2 करोड़ से ज्यादा ट्रांजेक्शन और उतने ही प्रमाण-पत्र जारी किए जा चुके हैं, जो इस सिस्टम की व्यापक पहुंच को दर्शाता है।

इस पोर्टल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आधार आधारित ई-केवाईसी, डिजिलॉकर, ई-प्रमाण, उमंग और ‘भाषिणी’ जैसी उन्नत तकनीकों का एकीकरण किया गया है। नागरिक व्हाट्सएप के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे और सेवा की स्थिति की जानकारी भी रीयल-टाइम में प्राप्त कर पाएंगे। साथ ही, प्रमाण-पत्र सीधे उनके मोबाइल पर डिजिटल हस्ताक्षर के साथ मिलेंगे।

‘सेवा सेतु’ में ट्रेजरी और ई-चालान को जोड़ा गया है, जिससे नागरिक एक ही प्लेटफॉर्म पर भुगतान कर तुरंत डिजिटल रसीद प्राप्त कर सकेंगे। डीबीटी के जरिए योजनाओं की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंचेगी, जिसकी जानकारी एसएमएस और व्हाट्सएप से मिलती रहेगी।

पोर्टल को और अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए क्यूआर कोड आधारित प्रमाण-पत्र सत्यापन, क्लाउड स्टोरेज, डिजिटल सिग्नेचर, रीयल-टाइम डैशबोर्ड और एमआईएस रिपोर्टिंग जैसी सुविधाएं जोड़ी गई हैं। यह प्लेटफॉर्म 22 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है, जिससे भाषा की बाधा भी खत्म हो गई है।

लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2011 के तहत समय-सीमा का पालन सुनिश्चित करने के लिए ऑटोमेटिक पेनल्टी कैलकुलेशन, समय-सीमा संकेतक और स्वतः शिकायत पंजीकरण जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं, जिससे जवाबदेही और पारदर्शिता को और मजबूती मिलेगी।

राज्य में इस डिजिटल व्यवस्था को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए 800 से अधिक लोक सेवा केंद्र, 1000 से ज्यादा चॉइस सेंटर और 15,000 से अधिक कॉमन सर्विस सेंटर सक्रिय हैं। यहां से नागरिक आसानी से सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या ‘सेवा सेतु’ वास्तव में लोगों की जिंदगी आसान बनाएगा या यह भी एक और डिजिटल प्रयोग बनकर रह जाएगा? फिलहाल, सरकार इसे प्रशासन और नागरिकों के बीच की दूरी खत्म करने वाला सबसे बड़ा कदम मान रही है, लेकिन असली परीक्षा तो इसके जमीन पर उतरने के बाद ही होगी।