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नई दिल्ली 2 अक्टूबर 2026 : जम्मू-कश्मीर में वंदे भारत एक्सप्रेस ने 2 अक्टूबर को चिनाब और अंजी रेलवे पुलों को 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पार किया। यह पहली बार है जब इन दोनों पुलों पर ट्रेन ने इस गति से परिचालन किया। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को इसका वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया। यह परीक्षण श्री माता वैष्णो देवी कटरा-बनिहाल रेल सेक्शन पर अधिकतम अनुमत गति 100 किमी/घंटा किए जाने के बाद हुआ।
वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन नंबर 26401/26404 ने परीक्षण के दौरान दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे आर्च पुल चिनाब ब्रिज और भारत के पहले केबल-स्टे रेलवे पुल अंजी ब्रिज को 100 किमी/घंटा की रफ्तार से पार किया। रेलवे अधिकारी के मुताबिक, इससे USBRL परियोजना के इस हिस्से में ट्रेन संचालन आसान होने और यात्रा समय कम होने की उम्मीद है।
कटरा-बनिहाल सेक्शन पर अब 100 की स्पीड
श्री माता वैष्णो देवी कटरा-बनिहाल सेक्शन करीब 111 किलोमीटर लंबा है। रेलवे ने इस सेक्शन पर ट्रेनों की अधिकतम अनुमत गति 100 किमी/घंटा कर दी है। यह बदलाव निर्धारित सुरक्षा शर्तें पूरी होने के बाद मंजूर किया गया।
इससे पहले कटरा और संगलदान के बीच ट्रेनों को अधिकतम 85 किमी/घंटा और संगलदान से बनिहाल के बीच 75 किमी/घंटा की गति से चलाने की अनुमति थी। नई सीमा लागू होने के बाद 2 अक्टूबर को 100 किमी/घंटा की गति का सफल परीक्षण किया गया।
चिनाब पुल की खासियत क्या है?
रियासी जिले में बना चिनाब रेलवे पुल चेनाब नदी से करीब 359 मीटर ऊपर है। इसे दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च पुल माना जाता है। यह USBRL परियोजना के सबसे प्रमुख ढांचों में शामिल है।
अंजी पुल भी रियासी में स्थित है। यह भारत का पहला केबल-स्टे रेलवे पुल है। यह गहरी अंजी खड्ड घाटी के ऊपर बना है। पुल का रेलवे डेक केंद्रीय तोरण और केबल-स्टे प्रणाली से सहारा पाता है।
यात्रियों को क्या फायदा होगा?
कटरा-बनिहाल सेक्शन USBRL परियोजना का हिस्सा है। यह इलाका कठिन हिमालयी भूभाग से होकर गुजरता है। इस हिस्से में कई सुरंगें और बड़े पुल हैं।
100 किमी/घंटा की अधिकतम अनुमत गति होने से इस सेक्शन पर ट्रेन संचालन को गति मिलने और यात्रा समय कम होने की उम्मीद है। इससे यात्रियों को तेज और अधिक आरामदायक रेल यात्रा मिल सकती है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 2 अक्टूबर को वंदे भारत के 100 किमी/घंटा की रफ्तार से दोनों पुलों को पार करने का वीडियो शेयर किया। उन्होंने इसे भारत की इंजीनियरिंग उपलब्धि से जुड़ा मील का पत्थर बताया।


