स्वतंत्र बोल
मोहला-मानपुर,12 मई 2026: छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर जिले में इस बार तेंदूपत्ता सीजन एक बड़े बदलाव का गवाह बन रहा है। कभी नक्सलियों की धमक और आगजनी की घटनाओं से दहशत में रहने वाले जंगल अब शांत नजर आ रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीण बिना किसी डर के जंगलों में पहुंचकर तेंदूपत्ता संग्रहण कर रहे हैं। जिले में 39 समितियों के जरिए तेंदूपत्ता संग्रहण का काम तेजी से जारी है।
छत्तीसगढ़ का “हरा सोना” कहे जाने वाले तेंदूपत्ते के लिए मोहला-मानपुर जिला प्रदेशभर में खास पहचान रखता है। हर साल यहां से बड़ी मात्रा में तेंदूपत्ता बाहर भेजा जाता है, लेकिन इस बार का सीजन इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि इलाके से नक्सलवाद का असर लगभग खत्म हो चुका है।
जानकारी के मुताबिक पहले तेंदूपत्ता सीजन के दौरान नक्सली सक्रिय हो जाते थे। ठेकेदारों को लेवी के लिए धमकाना और तेंदूपत्तों में आगजनी जैसी घटनाएं आम बात थीं। इससे ग्रामीणों और संग्रहण कार्य से जुड़े लोगों में डर बना रहता था। लेकिन अब हालात पूरी तरह बदलते नजर आ रहे हैं।
डीएफओ दिनेश पटेल ने बताया कि राजनांदगांव यूनियन के अंतर्गत मोहला-मानपुर जिले में बड़े स्तर पर तेंदूपत्ता संग्रहण होता है। पूरे यूनियन में 80 हजार मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें अकेले मोहला-मानपुर जिले से 60 हजार मानक बोरा संग्रहण होना है।
उन्होंने बताया कि जिले में कुल 39 समितियां संग्रहण कार्य में लगी हुई हैं। हालांकि शुरुआती बारिश के कारण कुछ क्षेत्रों में काम प्रभावित हुआ था, लेकिन अब मौसम साफ होने के बाद बाकी समितियों में भी तेजी से संग्रहण शुरू हो जाएगा।
डीएफओ ने यह भी कहा कि बारिश का आंशिक असर तेंदूपत्तों पर जरूर पड़ा है और कुछ जगहों पर पत्ते खराब हुए हैं, लेकिन इस बार नक्सलियों की ओर से किसी तरह की आगजनी या बाधा की आशंका नहीं है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की है कि जंगल में तेंदूपत्ता संग्रहण के दौरान जंगली जानवरों से सतर्क रहें और सुरक्षित तरीके से काम करें।
जिले में बदलते हालात को देखकर ग्रामीणों में भी राहत का माहौल है। वर्षों बाद ऐसा पहली बार माना जा रहा है जब तेंदूपत्ता सीजन बिना नक्सली खौफ के गुजर रहा है।


