जहा किसान खेती करते थे, वहा बन गया पार्किंग यार्ड.. कांग्रेस नेता ने लीज के बहाने बेच दी मंदिर की बेशकीमती जमीने ?

स्वतंत्र बोल
रायपुर 25 अप्रैल 2026.  प्रदेश के मठ मंदिरो की बेशकीमती जमीनों पर भूमाफियाओ धड़ल्ले से कब्ज़ा कर रहे और ट्रस्ट से जुड़े लोगो के सहयोग से बेच रहे है। राजधानी के नागरीदास मंदिर ट्रस्ट की रायपुर बिलासपुर हाइवे पर चरौदा में स्थित में बेशकीमती जमीन को स्वयं को ट्रस्टी बताकर कांग्रेसी नेता और पूर्व विधायक सत्यनारायण शर्मा ने ट्रांसपोर्टर को कथित रूप से बेच दिया। जिस जमीन पर पहले चरौदा के किसान खेती करते थे,उसे मुरम से पाटकर पार्किंग यार्ड बना दिया गया है।

दस्तावेजों के अनुसार चरौदा के मंदिर ट्रस्ट की 11 एकड़ जमीन को कांग्रेसी नेता सत्यनारायण शर्मा ने स्वयं को ट्रस्टी बताकर 30 साल के लिए ट्रांसपोर्टर विकास अग्रवाल और विवेक अग्रवाल पिता कैलाश अग्रवाल निवासी आनंदम सिटी को लीज पर देने का फैसला कर लिया। श्री शर्मा ने कागजो का पेट भरने रजिस्ट्रार लोक न्यास के पसस आवेदन कर लीज में देने एक निवेदन किया, जहा सुनवाई पेंडिंग है। हाइवे पर स्थित 11 एकड़ जमीन की कीमत अरबो रुपये में है उसे सत्यनारायण शर्मा मात्रा 20,000 प्रति अकड़ के दर से सालाना लीज पर ट्रांसपोर्टर को दे दिया, या कथित रूप से बेच दिया। जिस जमीन पर चरौदा के किसान धान और गेहू उपजाते थे अब वह ट्रके कड़ी हो रही, जमीन को बंजर किया जा रहा है।

एसडीएम की अनुमति नहीं, ट्रांसपोर्टर ने बना दिया यार्ड-
साल 2023 में सत्यनारायण शर्मा द्वारा लगाए गए आवेदन पर अब रजिस्ट्रार सार्वजानिक लोक न्यास द्वारा अनुमति नहीं दी गई, उसके बाद भी विकास अग्रवाल और विवेक अग्रवाल पिता कैलाश अग्रवाल ने उक्त जमीनों पर कब्ज़ा कर पार्किंग यार्ड बना दिया है। खेत को मिट्टी से पाटकार और चारो तरफ पक्का बाउंड्रीवाल करा दिया गया है। इस बारे में कारोबारी कैलाश अग्रवाल से पूछने पर बताया कि

“उन्हें सत्यनारायण शर्मा ने 30 सालो के लिए लीज पर देने का आश्वासन दिया, पर एसडीएम ने अनुमति नहीं दी तो कांग्रेसी नेता ने दो सालो केलिए साल 2023 में लीज पर दिया है, जिसे साल 2025 मेंबढाकर फिर से दो सालो के लिए लीज पर दे दिया है।”

नियम क्या कहता है-
लोक न्यास अधिनियम 1951 अनुसार मंदिर ट्रस्ट की जमींनो को बेचा नहीं जा सकता ना ही कृषि कार्य के लिए 07 वर्ष से अधिक लीज पर दिया जा सकता है। सत्यनारायण शर्मा नागरीदास मंदिर ट्रस्ट के मौजूदा समय में ट्रस्टी भी नहीं है, ऐसे में अनधिकृत रूप से मंदिर की जमीं लिज पर देने के बहाने बेच दी गई। उधर एसडीएम ने अनुमति देने के पहले तहसीलदार धरसींवा और मंदिर हसौद से रिपोर्ट मंगाया है।

 

 

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