स्वतंत्र बोल
रायपुर 15 अक्टूबर 2026: छत्तीसगढ़ की राजधानी स्थित रायपुर सेंट्रल जेल में शारदीय नवरात्र के अवसर पर भक्ति, आस्था और आत्मचिंतन का अनूठा माहौल देखने को मिल रहा है। जेल की सख्त पाबंदियों और सलाखों के पीछे इन दिनों ढोलक-मंजीरों की धुन पर मां दुर्गा के जयकारे और जसगीत गूंज रहे हैं। जेल में निरुद्ध कुल 760 बंदियों ने पूरे नौ दिनों का कड़ा उपवास रखा है, जिनमें 52 महिला बंदी भी शामिल हैं।
ढोलक-मंजीरों की धुन पर गूंज रहे भक्ति गीत
नवरात्र उत्सव के दौरान रायपुर सेंट्रल जेल परिसर में प्रतिदिन सुबह-शाम मां दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना और आरती की जा रही है। उपवास रखने वाले पुरुष और महिला बंदी सामूहिक रूप से एकत्र होकर ढोलक और मंजीरे बजाते हुए पारंपरिक जसगीत और भजन-कीर्तन गा रहे हैं। इस आयोजन से जेल की चारदीवारी के भीतर एक सकारात्मक और आध्यात्मिक वातावरण निर्मित हुआ है।
52 महिला बंदियों की भक्ति में विशेष सहभागिता
उपवास और साधना में जेल में बंद महिला बंदियों की भी बड़ी भागीदारी है। कुल 760 व्रतधारी बंदियों में से 52 महिला बंदी पूरे नियम और श्रद्धाभाव से नौ दिनों तक देवी दुर्गा की आराधना कर रही हैं। सभी बंदी अपने दैनिक कार्यों के साथ-साथ समय निकालकर पूजा-पाठ और आरती में हिस्सा ले रहे हैं।
अपराध के बीच आत्मचिंतन और मानसिक शांति का अवसर
विभिन्न मामलों में सजा काट रहे या विचाराधीन बंदियों के लिए नवरात्र का यह पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं है। जेल प्रशासन और बंदियों के अनुसार, भक्ति के ये नौ दिन उन्हें आत्मचिंतन, मानसिक शांति और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का अवसर प्रदान कर रहे हैं। सलाखों के पीछे गूंजते जयकारे बंदियों को अध्यात्म और नई सोच की ओर प्रेरित कर रहे हैं।


