स्वतंत्र बोल
जगदलपुर,20 अप्रैल 2026 । बस्तर के घने जंगलों में एक बार फिर ऐसी हलचल शुरू होने वाली है, जो बाहर से शांत दिखती है लेकिन भीतर हजारों परिवारों की किस्मत बदलने की ताकत रखती है। ‘हरा सोना’ कहे जाने वाले तेंदूपत्ता का सीजन इस बार कुछ अलग संकेत दे रहा है—जहां उम्मीदें भी ऊंची हैं और नजरें भी टिकी हुई हैं।
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वन विभाग ने इस बार रिकॉर्ड खरीदी का लक्ष्य तय करते हुए पूरी ताकत झोंक दी है। बस्तर सर्किल के सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर और बस्तर जिलों में 2 लाख 70 हजार मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण का लक्ष्य रखा गया है। सबसे ज्यादा उम्मीद बीजापुर से है, जहां जंगलों में तेंदूपत्ता की भरपूर पैदावार के संकेत मिले हैं।
इस बार तैयारियां सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं हैं। पूरे सर्किल में 75 समितियों के जरिए 119 लॉट बनाए गए हैं, जबकि संग्रहण और भंडारण को सुचारू रखने के लिए 43 परिवहन समूह भी मैदान में उतर चुके हैं। इतना ही नहीं, ग्रामीणों की सुविधा के लिए 10 नए फड़ जोड़े गए हैं, जिससे अब कुल संख्या 1300 के पार पहुंच गई है।
लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में सबसे बड़ा बदलाव भुगतान व्यवस्था को लेकर देखने को मिल रहा है। अब संग्राहकों को उनकी मेहनत की कमाई सीधे बैंक खातों में मिलेगी। इसके लिए आधार लिंकिंग का काम तेजी से किया जा रहा है। बीजापुर जिले में ही 53 हजार से ज्यादा परिवारों में से अधिकांश के खाते खुल चुके हैं, जिससे इस बार भुगतान में पारदर्शिता की उम्मीद और बढ़ गई है।
तेंदूपत्ता को ‘हरा सोना’ यूं ही नहीं कहा जाता। 50-50 पत्तों की गड्डी और 1000 गड्डियों से बनने वाला एक मानक बोरा ग्रामीणों की जिंदगी में बड़ा बदलाव लाता है। फिलहाल प्रति मानक बोरा 5500 रुपए का भुगतान तय है, जो हजारों परिवारों के लिए सीधी आमदनी का जरिया बनेगा।
एक और बड़ा बदलाव इस बार यह है कि नक्सल प्रभाव में कमी आने के बाद तेंदूपत्ता सीजन पर किसी तरह की लेवी वसूली का दबाव नहीं है। ऐसे में यह सीजन सिर्फ खरीदी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बस्तर के वनांचल में रोजगार, आय और नई उम्मीदों का दरवाजा खोल सकता है।
अब सवाल यही है—क्या इस बार ‘हरा सोना’ सच में बस्तर की तस्वीर बदल देगा, या फिर जंगलों की यह खामोश हलचल किसी नए मोड़ की ओर इशारा कर रही है। आने वाले दिनों में इसका जवाब खुद जंगल ही देंगे।
