बाबा नीब करौरी महाराज की करोड़ों की पैतृक संपत्ति पर नया मोड़, 6 पौत्रियों ने ट्रस्ट को बताया ‘अवैध’

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टूंडला (फिरोजाबाद) 14 सितंबर 2026। महान संत बाबा नीब करौरी महाराज की जन्मस्थली अकबरपुर स्थित उनकी पैतृक संपत्ति को लेकर चल रहा विवाद प्रशासनिक चौखट पर गरमा गया है। प्रशासन के नोटिस का जवाब देते हुए बाबा की छह पौत्रियों ने आधिकारिक रूप से पैतृक मकान, डाक बंगले और मंदिर पर अपना वारिसाना हक जताया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यह संपत्ति उनके परिवार की ही है और इस पर किसी ट्रस्ट का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। गौरतलब है कि 24 अगस्त को बाबा की पौत्री भावना रावत के पति मनोज रावत ने जिलाधिकारी कार्यालय में शिकायती पत्र सौंपकर आरोप लगाया था कि ठाकुर जी हनुमान ट्रस्ट ने इस पैतृक धरोहर पर जबरन कब्जा जमा लिया है।

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डीएम के निर्देश पर जांच कमेटी गठित

शिकायत की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा ने एडीएम न्यायिक अरविंद द्विवेदी के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया था। इसके साथ ही प्रशासन ने दोनों पक्षों को सात दिन के भीतर जवाब दाखिल करने का नोटिस भी थमाया था। तहसीलदार के माध्यम से सौंपे गए अपने जवाब में पौत्री भावना रावत, सुनीला शर्मा, अर्चना शर्मा, वंदना शर्मा, रितु तिवारी और रिचा रावत ने जोर देकर कहा कि उक्त जायदाद को न कभी बेचा गया और न ही इसे किसी ट्रस्ट या व्यक्ति को दान दिया गया है।

सरकारी अभिलेखों में बाबा का ही नाम दर्ज

सरकारी अभिलेखों का हवाला देते हुए पौत्रियों ने बताया कि भूखंड संख्या 220 (पैतृक मकान) की घरौनी में आज भी बाबा का नाम दर्ज है। वहीं, भूखंड संख्या 211 बाबा नीब करौरी की जन्मस्थली के रूप में दर्ज है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि घरौनी अभिलेखों में कानूनी वारिस के रूप रूप में परिवार के सदस्यों के नाम दर्ज किए जाएं और उन्हें संपत्ति पर वास्तविक कब्जा दिलाया जाए।

प्रशासनिक लापरवाही से उलझा मामला

इस मामले में एक प्रशासनिक पेच और फंस गया है। पौत्रियों ने सात सितंबर को तहसीलदार कार्यालय से प्राप्त नोटिस के जवाब में तहसील पहुंचकर अपना पक्ष दाखिल किया था। उस दिन संपूर्ण समाधान दिवस होने के कारण कर्मचारियों ने उनके जवाब को गलती से एक शिकायती पत्र के रूप में दर्ज कर लिया। इस तकनीकी गड़बड़ी के कारण जांच कमेटी के अध्यक्ष एडीएम तक वह जवाब पहुंच ही नहीं सका। अब इस गलत शिकायत के निस्तारण और सही जवाब को कमेटी तक पहुंचाना प्रशासन के लिए नई चुनौती है।