मठ की जमीनों का खेला: ट्रांसफर के बाद तहसीलदार ने किया नामांतरण, उधर दतरेंगा की जमीन पर बिल्डर की नजर।

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रायपुर 16 जनवरी 2025.  श्रीरामचंद्र स्वामी जैतूसाव मठ की दतरेंगा स्थित कृषि भूमि के रजिस्ट्री और नामांतरण पर तत्कालीन तहसीलदार अजय चंद्रवंशी पर गंभीर आरोप है। चंद्रवंशी वही तहसीलदार है जिन्होंने धरमपुरा के मठ जमीन को सोनू राम साहू और सोनसाय साहू के नाम पर नामान्तरित किया था, जिसके बाद से ही पूरा मामला सार्वजनिक हुआ है। जैतूसाव मठ प्रबंधन द्वारा आपत्ति के बाद दतरेंगा के साढ़े 17 एकड़ जमीन का नामांतरण किया था। बताते है कि तहसीलदार अजय चंद्रवंशी का तबादला आदेश जारी होने के बाद उसने नामांतरण किया है, जिससे अधिकारी का पर्सनल इंट्रेस्ट दिखता है। उधर धरमपुरा के स्थित मठ की जमीनों में फर्जीवाड़ा के आरोप महंत आशीष दास और अखिलेश जैन दोनों ने लगाया है और आरोपों के केंद्र में तहसीलदार अजय चंद्रवंशी है।

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तहसीलदार का दुस्साहस: दस्तावेजों के फर्जी होने की शिकायत, मामला कोर्ट में पेंडिंग.. फिर भी कर दिया नामांतरण।

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भूमाफियाओ और राजस्व अधिकारियो की साठगांठ से जैतूसाव मठ जमीने बिकती रही है, और धरमपुरा और दतरेंगा में भी यही हुआ है। चंद्रवंशी द्वारा धरमपुरा के खसरा क्रमांक 298/4 के 1.198 हेक्टयेर जमीन को जामगांव निवासी सोनू राम साहू और सोनसाय साहू के नाम नामान्तरण किया गया, फिर कुछ महीनो बाद ही दोनों किसानो ने अपनी जमीन गायत्री प्रोजेक्ट के भागीदार मुकेश शाही को बेच दिया।

उधर मठ की दतरेंगा स्थित साढ़े 17 एकड़ जमीन साल 1972 में बिकने के बाद 2024 में किसान गणेशराम साहू के नाम पर नामांतरण हुआ, उसके पीछे भी एक बिल्डर का हाथ बताया जाता है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार उस जमीन पर अविनाश बिल्डर निर्माण कार्य करना चाहता है, जिसके लिए मठ की आपत्ति के बाद भी आनन् फानन में तहसीलदार ने नामांतरण किया गया, जबकि दस्तावेजों में गड़बड़ी की शिकायते थी। आगामी दिनों में किसान गणेशराम साहू उस जमीन को अविनाश बिल्डर को बेच दे तो हैरानी नहीं होगी।

परंपरा गार्डन के संचालक बोले- हमने किसान से खरीदी जमीन, एडीएम को जाँच का अधिकार नहीं.. उधर एसडीएम ने महंत रामभूषण दास को बताया अवैध।