जमींदोज इतिहास और 650 साल पुराना कुंड: जानिए रायपुर के उस गुप्त मठ का राज जो साल में एक दिन देता है दर्शन

04 10 2022 kankali math raipur

स्वतंत्र बोल
रायपुर 20 अक्टूबर 2026:
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के पुरानी बस्ती स्थित ऐतिहासिक कंकाली मठ के कपाट विजयादशमी के अवसर पर साल में केवल एक दिन के लिए खोले गए हैं। मंगलवार सुबह 6 बजे से ही यहां श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई हैं। मठ के भीतर नागा साधुओं के करीब 1000 साल पुराने कमंडल, त्रिशूल, ढाल, कुल्हाड़ी और वस्त्र जैसी प्राचीन वस्तुएं रखी गई हैं, जिनकी विशेष पूजा की जा रही है। श्रद्धालु रात 12 बजे तक इन दुर्लभ वस्तुओं के दर्शन कर सकेंगे, जिसके बाद कपाट फिर एक साल के लिए बंद कर दिए जाएंगे।

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क्या है कंकाली मठ का प्राचीन इतिहास?

कंकाली मठ की देखरेख वर्तमान में महंत कृपाल गिरी महाराज की 12वीं पीढ़ी कर रही है। इतिहास के अनुसार, माता कंकाली ने स्वप्न में महंत कृपाल गिरी महाराज को तालाब के किनारे मंदिर बनवाकर प्रतिमा स्थापित करने का आदेश दिया था।

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जब प्रतिमा को मंदिर में स्थापित किया गया, तो महंत दुखी रहने लगे। तब माता ने उन्हें दर्शन देकर वचन दिया था कि वे विजयादशमी के दिन अपने पुराने घर यानी मठ में वापस विराजमान होंगी। इसी पौराणिक मान्यता के चलते हर साल दशहरे पर मठ के कपाट खोले जाते हैं और देवी अपने अस्त्र-शस्त्रों के साथ यहां विराजमान होती हैं।

तांत्रिक साधना और 650 साल पुराने तालाब का रहस्य

श्मशान घाट पर निर्मित कंकाली मठ को नागा साधुओं की तांत्रिक साधना का प्रमुख केंद्र माना जाता है। मठ के आसपास कई नागा साधुओं की समाधियां भी स्थित हैं।

इसके साथ ही, यहां स्थित कंकाली तालाब करीब 650 साल पुराना है, जिसे पहले ‘कंकाली कुंड’ कहा जाता था। शारदीय और चैत्र नवरात्र के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और नवमी-दशमी पर तालाब में ज्योत-जवारा का विसर्जन किया जाता है।