स्वतंत्र बोल
रायपुर, 27 अप्रैल 2026: अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन के चुनाव में इस बार ऐसा नतीजा सामने आया है, जिसने पूरे संगठन में हलचल मचा दी है। आर्थिक भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों से घिरे गोपाल शरण गर्ग को करारी हार का सामना करना पड़ा है, जबकि बसंत मित्तल ने करीब 300 वोटों के अंतर से जीत दर्ज कर सभी को चौंका दिया।
|
WhatsApp Group
|
Join Now |
|
Facebook Page
|
Follow Now |
|
Twitter
|
Follow Us |
|
Youtube Channel
|
Subscribe Now |
चुनाव के नतीजे सिर्फ एक व्यक्ति की हार तक सीमित नहीं रहे, बल्कि गोपाल शरण गर्ग का पूरा पैनल भी बुरी तरह पराजित हो गया। इसके साथ ही संगठन में नई कार्यकारिणी का गठन हो गया है, जिसका कार्यकाल 2026 से 2031 तक रहेगा। बसंत मित्तल की जीत के बाद समाज के एक बड़े वर्ग में खुशी का माहौल देखा जा रहा है।
दरअसल, इस चुनाव के पहले ही माहौल काफी गर्म हो चुका था। गोपाल शरण गर्ग पर सैकड़ों किलो चांदी, करोड़ों रुपए और अरबों की जमीन के गबन जैसे गंभीर आरोप लगे थे। रायपुर के आजीवन सदस्य सतनारायण मित्तल ने सार्वजनिक रूप से इन कथित अनियमितताओं का खुलासा किया था, जिससे मामला और ज्यादा तूल पकड़ गया।
बताया गया कि हरियाणा के अग्रोहा में कुलदेवी महालक्ष्मी मंदिर निर्माण के नाम पर देशभर से भारी मात्रा में चंदा एकत्र किया गया। लोगों ने लाखों रुपए तक का योगदान दिया, लेकिन आरोप है कि इस रकम को संस्था के आधिकारिक खातों में दर्ज नहीं किया गया। इसके बजाय रसीदें काटकर बाद में दस्तावेजों को नष्ट कर दिया गया।
मामला यहीं नहीं थमा। आरोप यह भी है कि करीब 200 किलो से अधिक चांदी दान में मिलने के बावजूद उसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं रखा गया। यहां तक कि चांदी को बेचकर हवाला के जरिए पैसे इधर-उधर करने की बात भी सामने आई है। एक रसीद में 75 लाख रुपए के संदिग्ध लेनदेन का जिक्र होने से मामला और गंभीर हो गया है।
इन तमाम आरोपों के बीच हुए चुनाव में मतदाताओं ने अपना रुख साफ कर दिया और नतीजों ने संगठन की दिशा बदल दी। अब नई कार्यकारिणी के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन में पारदर्शिता बहाल करने और उठे सवालों के जवाब देने की होगी।
