क्या दिसंबर 2026 में होने वाले हैं नगरीय चुनाव? प्रशासन की नई गाइडलाइन से सियासी हलचल तेज

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स्वतंत्र बोल
दुर्ग 12 अक्टूबर 2026:
छत्तीसगढ़ में आगामी नगरीय निकाय चुनाव को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार दिसंबर 2026 में प्रस्तावित नगरीय चुनाव की तैयारियों के बीच दुर्ग जिला प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है। भिलाई, रिसाली, भिलाई-चरोदा और जामुल नगर पालिका क्षेत्रों में चुनाव की तैयारियां अंतिम चरण की ओर बढ़ रही हैं। इसी कड़ी में भिलाई नगर निगम ने मतदान दलों की रवानगी, सामग्री वितरण और मतगणना को लेकर महत्वपूर्ण आदेश जारी कर दिए हैं, जिसके तहत सेक्टर-7 स्थित कल्याण स्नातकोत्तर महाविद्यालय को मुख्य केंद्र बनाया गया है।

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कल्याण कॉलेज से होगी पोलिंग पार्टियों की रवानगी और मतगणना

भिलाई निगम आयुक्त की ओर से उप जिला निर्वाचन अधिकारी को भेजे गए पत्र के अनुसार, आगामी निकाय चुनाव में महापौर और वार्ड पार्षद पदों के लिए नाम निर्देशन पत्र भिलाई निगम के महापौर कार्यालय में प्राप्त किए जाएंगे। वहीं, चुनाव से जुड़ी सभी प्रमुख गतिविधियों का संचालन कल्याण स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सेक्टर-7 भिलाई नगर से होगा। यहीं से मतदान के लिए जरूरी सामग्री का वितरण किया जाएगा, मतदान दलों को रवाना किया जाएगा और मतदान के बाद उनकी वापसी की व्यवस्था भी यहीं रहेगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि चुनाव के बाद वोटो की गिनती (मगणना) भी इसी महाविद्यालय परिसर में संपन्न कराई जाएगी। इसके अलावा, मतदाता सूची तैयार करने से जुड़े बीएलओ (BLO) और प्राधिकृत अधिकारियों के प्रशिक्षण का स्थान भी अब बदल दिया गया है।

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30 नवंबर को होगा मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन

भारत निर्वाचन आयोग और राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशों के तहत मतदाता सूची में छूटे हुए मतदाताओं और पहली बार वोट देने वाले युवाओं के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। दुर्ग जिले में बीएलओ और पर्यवेक्षकों का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है। मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्यक्रम के तहत अंतिम प्रकाशन आगामी 30 नवंबर को किया जाना प्रस्तावित है। इसके साथ ही नागरिकों से दावा-आपत्ति की प्रक्रिया भी पूरी की जा रही है।

वार्डों में सक्रिय हुए पार्षद और राजनीतिक दलों की बैठकें

प्रशासनिक तैयारियों के साथ-साथ राजनीतिक दलों की गतिविधियां भी परवान चढ़ने लगी हैं। चुनाव की आहट मिलते ही वार्डों से लंबे समय से नदारद रहने वाले पार्षद अब गलियों और मोहल्लों में नजर आने लगे हैं। वे अपने वार्डों में कराए गए विकास कार्यों को गिनाते हुए मतदाताओं से संपर्क साध रहे हैं। कुछ पार्षद केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का हवाला देकर सभाएं कर रहे हैं। वहीं, दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों ने टिकट वितरण और पार्षद पद के संभावित प्रत्याशियों के चयन के लिए वार्डवार कमेटियों का गठन करना शुरू कर दिया है।