स्वतंत्र बोल
रायपुर। छत्तीसगढ़ की मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना ने एक साल पूरा कर लिया है। 4 अक्टूबर 2025 को जगदलपुर से शुरू हुई योजना के तहत अब बस्तर और सरगुजा संभाग के 13 जिलों में 106 मार्गों पर 107 बसें चल रही हैं। इन बसों से 850 ऐसे गांव जुड़े हैं, जहां पहले नियमित यात्री बस सेवा उपलब्ध नहीं थी। एक साल में बसों ने करीब 24 लाख किलोमीटर का सफर तय किया है।
अभी योजना की बसें रोजाना करीब 17,500 किलोमीटर चल रही हैं। अधिसूचित मार्गों की कुल लंबाई करीब 5,300 किलोमीटर है। अलग-अलग मार्ग 14 से 105 किलोमीटर तक लंबे हैं। अधिकांश मार्गों पर रोजाना दो ट्रिप संचालित की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने योजना के एक साल पूरे होने पर कहा कि दूरदराज के गांवों में रहने वाले लोगों को भी शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, बाजार और प्रशासनिक सेवाओं तक पहुंच का समान अवसर मिलना चाहिए। उनके मुताबिक, योजना के जरिए उन इलाकों में नियमित बस सेवा पहुंची है, जहां पहले यह सुविधा नहीं थी।
34 मार्गों से हुई थी शुरुआत
मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना की शुरुआत 4 अक्टूबर 2025 को जगदलपुर में हुई थी। कार्यक्रम में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मौजूद थे।
शुरुआत में 34 मार्गों पर बस सेवा शुरू की गई थी। उस समय करीब 250 गांवों को इससे जोड़ा गया था। एक साल में योजना का दायरा बढ़कर 106 मार्गों और 107 बसों तक पहुंच गया है। अब नियमित बस सेवा से जुड़े गांवों की संख्या 850 हो गई है।
योजना के पहले चरण में बस्तर और सरगुजा संभाग को शामिल किया गया है। बस्तर संभाग में 51 मार्गों पर 50 बसें और सरगुजा संभाग में 55 मार्गों पर 57 बसें चल रही हैं।
किस जिले में कितनी बसें चल रही हैं?
बस्तर संभाग में सुकमा के 8 मार्गों पर 9 बसें, दंतेवाड़ा के 7 मार्गों पर 7 बसें, बीजापुर के 11 मार्गों पर 11 बसें, नारायणपुर के 4 मार्गों पर 4 बसें, बस्तर के 5 मार्गों पर 5 बसें, कांकेर के 12 मार्गों पर 12 बसें और कोंडागांव के 8 मार्गों पर 9 बसें संचालित हो रही हैं।
सरगुजा संभाग में सरगुजा जिले के 8 मार्गों पर 8 बसें, सूरजपुर के 10 मार्गों पर 9 बसें, बलरामपुर के 7 मार्गों पर 7 बसें, जशपुर के 16 मार्गों पर 16 बसें, कोरिया के 6 मार्गों पर 6 बसें और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर के 4 मार्गों पर 4 बसें चल रही हैं।
जहां पिकअप पर निर्भर थे ग्रामीण, वहां पहुंची बस
योजना का उद्देश्य सुदूर ग्रामीण और जनजातीय इलाकों की परिवहन जरूरत को पूरा करना है। इन क्षेत्रों के कई गांवों में पहले नियमित बस सेवा नहीं थी। ऐसे में ग्रामीणों को पिकअप और अन्य मालवाहक वाहनों से सफर करना पड़ता था।
इसका असर महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों की यात्रा पर भी पड़ता था। दूसरी ओर, कम यात्री संख्या वाले दुर्गम मार्गों पर निजी बस संचालकों के लिए नियमित बस चलाना व्यावसायिक रूप से मुश्किल था।
राज्य शासन की वित्तीय सहायता से ऐसे मार्गों पर नियमित यात्री परिवहन शुरू किया गया।
कोंटा-जगरगुंडा रूट पर बदली तस्वीर
सुकमा जिले में कोंटा से जगरगुंडा के करीब 83 किलोमीटर लंबे मार्ग पर भी योजना के तहत बस सेवा शुरू की गई। जून 2026 में किए गए फील्ड आकलन में इस मार्ग पर महिलाओं, स्कूली विद्यार्थियों और मरीजों के बस से सफर करने की जानकारी सामने आई।
ग्रामीण इस बस सेवा से आम, महुआ, मुर्गी और अन्य वनोपज लेकर हाट-बाजार तक पहुंच रहे हैं। काम के लिए बाहर जाने वाले मजदूरों और युवाओं के लिए भी यह सेवा उपयोगी बताई गई है।
बस के साथ गांवों तक पहुंच रहा बाजार
योजना का असर केवल यात्री परिवहन तक सीमित नहीं है। ग्रामीण अपने उत्पाद और वनोपज बाजार तक ले जा रहे हैं। वहीं बाजार से जरूरी सामान गांवों तक पहुंच रहा है।
नियमित बस संपर्क से गांवों का हाट-बाजार, विकासखंड और जिला मुख्यालय से आवागमन बढ़ा है। कुछ मार्गों पर सुरक्षा बलों के कैंप भी हैं। वहां तैनात जवानों को भी बस सेवा से आवागमन की सुविधा मिल रही है।
तीन साल तक मिलती है प्रति किलोमीटर सहायता
कम यात्री संख्या वाले मार्गों पर बस संचालन को व्यावहारिक बनाने के लिए राज्य सरकार बस संचालकों को प्रति किलोमीटर वित्तीय सहायता दे रही है।
पहले वर्ष में 26 रुपये प्रति किलोमीटर, दूसरे वर्ष में 24 रुपये और तीसरे वर्ष में 22 रुपये प्रति किलोमीटर सहायता का प्रावधान है। यह सहायता अधिकतम तीन साल तक दी जाती है।
योजना के तहत संचालित वाहनों को मासिक मोटरयान कर में भी अधिकतम तीन साल तक छूट का प्रावधान है। अब तक 107 बस संचालकों को कुल 5.77 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी जा चुकी है।
इस व्यवस्था में बस का स्वामित्व और संचालन निजी संचालक के पास रहता है। यात्री किराया भी संचालक को मिलता है। राज्य सरकार उन मार्गों पर निर्धारित वित्तीय सहायता देती है, जहां नियमित बस सेवा चलाना मुश्किल है।
GPS से हो रही बसों की निगरानी
योजना में बसों की निगरानी के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। हर बस में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस यानी VLTD लगाया गया है।
इसके जरिए परिवहन विभाग के कंट्रोल एवं कमांड सेंटर से बसों की निगरानी की जाती है। MMGBY पोर्टल पर बसों की लाइव ट्रैकिंग, ट्रिप, रूट और स्टॉपेज की जानकारी उपलब्ध रहती है।
बस संचालकों को वित्तीय सहायता का भुगतान अधिसूचित मार्ग पर वास्तव में चले किलोमीटर के आधार पर ऑनलाइन VLTD रिपोर्ट के अनुसार किया जाता है। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी रोज की रिपोर्ट की जांच के बाद उसे स्वीकृत या अस्वीकृत करते हैं।
यात्रियों की सुविधा के लिए बसों की समय-सारिणी बस संगवारी ऐप पर भी उपलब्ध कराई जा रही है।


