स्वतंत्र बोल
आजमगढ़ 23 सितंबर 2026: शंभूपुर गहजी गांव में हुए हत्याकांड की जांच आगे बढ़ने के साथ कई पुरानी कड़ियां सामने आ रही हैं। इस वारदात का संबंध करीब सात साल पुराने एक हत्याकांड और उसके बाद परिवार में पैदा हुए शक और विवाद से जुड़ता दिख रहा है। एनकाउंटर में मारे गए अरविंद सिंह के भाई सुनील सिंह की 2019 में गोली मारकर हत्या हुई थी। स्थानीय लोगों के मुताबिक, भाई की हत्या के बाद अरविंद बुरी तरह टूट गया था और तनाव में रहने लगा था।
2019 की हत्या के बाद बढ़ा था पारिवारिक विवाद
साल 2019 में अरविंद के भाई सुनील सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में उसके चचेरे भाइयों मनीष और अविनाश के नाम सामने आए थे। परिवार और स्थानीय लोगों के मुताबिक, सुनील और मनीष के बीच विवाद अरविंद की पत्नी बबीता को लेकर पैदा हुए शक से जुड़ा था। बताया गया कि सुनील और अरविंद को शक था कि बबीता का मनीष के साथ अफेयर है। इसी विवाद के बीच सुनील ने मनीष के खिलाफ चोरी और छेड़खानी की शिकायत भी की थी। इसके बाद दोनों परिवारों के बीच तनाव बढ़ता गया। 2019 में सुनील की हत्या कर दी गई। सुनील की हत्या के बाद अरविंद के मन में पत्नी को लेकर शक और गहरा गया। स्थानीय लोगों के मुताबिक, वह पत्नी को अपने भाई की हत्या के लिए जिम्मेदार मानने लगा था। इसी बात को लेकर पति-पत्नी के बीच अक्सर विवाद होता था। पुराने हत्याकांड और पारिवारिक विवाद को इस मौजूदा घटना की अहम कड़ी माना जा रहा है। हालांकि, बबीता और मनीष के कथित संबंध तथा 2019 की हत्या के बीच सीधा संबंध होने के दावों की पुष्टि जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड से ही होगी।
सुनील की आत्मा की शांति के लिए कराया जा रहा था पाठ
सुनील की मौत के बाद परिवार में उसकी आत्मा को लेकर भी बात होने लगी थी। बबीता को लगता था कि सुनील की आत्मा घर में भटक रही है। इसी वजह से उसकी आत्मा की शांति के लिए घर में पांच दिवसीय महामृत्युंजय पाठ कराया जा रहा था। पूजा के अंतिम दिन घर में दो पुरोहित महेंद्र पाठक और अखिलेश मिश्रा मौजूद थे। परिवार से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, सुनील की आत्मा को लेकर पूजा-पाठ कराने का फैसला किया गया था।
‘भाई की आत्मा की शांति के लिए क्यों हो रहा पाठ?’
अरविंद जब बाजार से घर लौटा तो उसने घर में धार्मिक अनुष्ठान होते देखा। उसने पुरोहितों से पूजा के बारे में सवाल किया। इसके बाद उनसे आधार कार्ड मांगने को लेकर विवाद शुरू हो गया। स्थानीय लोगों के मुताबिक, अरविंद के मन में पहले से भाई की हत्या और पत्नी को लेकर शक जैसी बातें चल रही थीं। ऐसे में सुनील की आत्मा की शांति के लिए कराया जा रहा अनुष्ठान भी उसके गुस्से की वजह बना। हालांकि, इस दावे की पूरी पुष्टि जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों से ही होगी।
पुरोहितों से बहस के बाद चली गोलियां
आरोप है कि पुरोहितों से बहस के बाद अरविंद कमरे के अंदर गया और अपनी लाइसेंसी राइफल लेकर बाहर आया। इसके बाद उसने पत्नी बबीता को गोली मार दी। फिर पूजा करा रहे दोनों पुरोहितों पर भी फायरिंग की। गोली चलने की आवाज सुनकर ग्रामीण मौके की ओर दौड़े। इसके बाद अरविंद अपने तीन बच्चों के साथ घर के एक कमरे में बंद हो गया। इसी दौरान उसने आठ साल के बेटे को भी गोली मार दी। घटना के बाद पुलिस ने मकान को घेर लिया। अरविंद को सरेंडर करने के लिए समझाने की कोशिश की गई। रिश्तेदारों के जरिए भी उससे बातचीत कराई गई, लेकिन वह बाहर आने को तैयार नहीं हुआ। पुलिस के मुताबिक, करीब सात घंटे तक ऑपरेशन चलता रहा।
बच्चों को ढाल बनाकर बैठा रहा अरविंद
ADG नवीन अरोड़ा के मुताबिक, अरविंद बच्चों को अपनी ढाल बताते हुए पुलिस से पीछे हटने के लिए कह रहा था। पुलिस और रिश्तेदार लगातार उसे समझाने की कोशिश करते रहे। करीब सात घंटे बाद कमरे के अंदर से गोली चलने की आवाज आई। पुलिस को आशंका हुई कि अंदर बच्चों की जान खतरे में है। इसके बाद पुलिस टीम ने स्टन ग्रेनेड और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। दरवाजा तोड़कर टीम अंदर दाखिल हुई। पुलिस के मुताबिक, अंदर पहुंचते ही अरविंद ने टीम पर कई राउंड फायर किए। बच्चों को सुरक्षित निकालने के दौरान पुलिस की जवाबी कार्रवाई में वह घायल हो गया। उसे और घायल बेटे को अस्पताल ले जाया गया। इलाज के दौरान दोनों की मौत हो गई। दो बेटियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
अब जांच में इन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे
हत्याकांड की पूरी तस्वीर सामने लाने के लिए 2019 की सुनील सिंह की हत्या, उसके बाद परिवार में बढ़े विवाद, बबीता को लेकर लगाए गए आरोप और घर में कराए जा रहे धार्मिक अनुष्ठान की भूमिका महत्वपूर्ण है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में पारिवारिक विवाद और पुराने हत्याकांड के बाद पैदा हुए तनाव की कड़ियां सामने आई हैं। लेकिन वारदात की वास्तविक वजह और अलग-अलग घटनाओं के बीच संबंध जांच और साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट होगा।


