छोटी दिवाली आज, जानें अभ्यंग स्नान और यम दीपदान का शुभ मुहूर्त

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धर्म डेस्क 11 नवंबर 2026:
छोटी दिवाली का पर्व आज यानी 7 नवंबर, शनिवार को मनाया जा रहा है। इसे नरक चतुर्दशी और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने राक्षस नरकासुर का वध कर उसकी कैद में बंद हजारों कन्याओं को मुक्त कराया था। इसी घटना की याद में छोटी दिवाली मनाई जाती है। इस दिन सुबह अभ्यंग स्नान और शाम को दीपदान का विशेष महत्व बताया गया है। इस साल चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर की सुबह 10:47 बजे शुरू होगी और 8 नवंबर की सुबह 11:47 बजे तक रहेगी।

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छोटी दिवाली 2026 के शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, 7 नवंबर को छोटी दिवाली पर अभ्यंग स्नान और यम दीपदान के लिए ये समय बताए गए हैं।

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पूजा या धार्मिक कार्य शुभ समय
चतुर्दशी तिथि शुरू 7 नवंबर, सुबह 10:47 बजे
चतुर्दशी तिथि समाप्त 8 नवंबर, सुबह 11:47 बजे
अभ्यंग स्नान सुबह 5:41 से 6:38 बजे तक
चंद्रोदय शाम 5:41 बजे
यम दीपदान शाम 5:31 से 5:57 बजे तक
सायाह्न संध्या शाम 5:31 से 6:50 बजे तक

क्या है छोटी दिवाली की पौराणिक कथा?

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में नरकासुर नाम का एक शक्तिशाली असुर था। उसे भौमासुर भी कहा जाता था। उसके अत्याचारों से धरती और स्वर्ग के लोग परेशान थे। उसने कई राजाओं और देवताओं को संकट में डाल दिया था। कथा के मुताबिक, नरकासुर ने करीब 16 हजार कन्याओं को बंदी बना लिया था। उसे वरदान मिला था कि उसकी मृत्यु किसी स्त्री के हाथों ही होगी। उसके अत्याचारों से परेशान होकर देवराज इंद्र भगवान श्रीकृष्ण के पास पहुंचे और उनसे मदद मांगी।

सत्यभामा ने किया था नरकासुर का वध

इंद्र की बात सुनकर भगवान श्रीकृष्ण नरकासुर का अंत करने के लिए अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ युद्ध के लिए निकले। मान्यता है कि युद्ध में सत्यभामा के हाथों ही नरकासुर का वध हुआ। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर की कैद में मौजूद 16 हजार से अधिक कन्याओं को मुक्त कराया। कहा जाता है कि यह घटना कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को हुई थी। इसी की याद में हर साल नरक चतुर्दशी मनाई जाती है, जिसे छोटी दिवाली भी कहते हैं।

छोटी दिवाली पर स्नान और दीपदान का महत्व

मान्यता है कि छोटी दिवाली पर सुबह अभ्यंग स्नान करना शुभ होता है। वहीं, शाम को घर के बाहर दीपक जलाने और यम दीपदान की परंपरा है। लोग इस दिन परिवार की सुख-शांति और खुशहाली की कामना करते हैं। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश भी देता है।