स्वतंत्र बोल
ओडिशा ,04 मई 2026: छत्तीसगढ़ से लगे ओडिशा के जंगलों में ऐसा खतरनाक खेल चल रहा था, जिसकी भनक लगते ही पुलिस भी दंग रह गई। मलकानगिरी जिले के चित्रकोंडा के घने और दुर्गम जंगलों में एक ‘चलती-फिरती ड्रग फैक्ट्री’ का पर्दाफाश हुआ है, जहां करोड़ों का अवैध कारोबार चुपचाप फल-फूल रहा था।
कोरापुट रेंज के डीआईजी डॉ. केवी सिंह के नेतृत्व में की गई इस बड़ी कार्रवाई में पुलिस ने करीब 800 लीटर हशीश ऑयल बरामद किया है, जिसकी कीमत लगभग 100 करोड़ रुपए आंकी जा रही है। इतना ही नहीं, मौके से 50 किलो गांजा और ड्रग्स बनाने के अत्याधुनिक उपकरण भी जब्त किए गए हैं, जो इस पूरे नेटवर्क की गंभीरता और तकनीकी तैयारी को उजागर करते हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि यह कोई स्थायी फैक्ट्री नहीं थी, बल्कि एक हाईटेक मोबाइल यूनिट के रूप में तैयार की गई थी। जंगल के भीतर इस तरह से सेटअप बनाया गया था कि जरूरत पड़ते ही पूरी यूनिट को मिनटों में समेटकर दूसरी जगह शिफ्ट किया जा सके। यानी यह नेटवर्क सिर्फ बड़ा ही नहीं, बल्कि बेहद शातिर और संगठित तरीके से काम कर रहा था।
बताया जा रहा है कि यहां गांजे को प्रोसेस कर इंटरनेशनल मार्केट के लिए हशीश ऑयल तैयार किया जाता था। मलकानगिरी-कोरापुट बेल्ट लंबे समय से गांजा तस्करी का बड़ा हॉटस्पॉट माना जाता रहा है, जहां से देश के अलग-अलग हिस्सों में सप्लाई की जाती है।
हालांकि, पुलिस की रेड की भनक लगते ही तस्कर जंगल का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए। इससे यह आशंका और गहरी हो गई है कि इस नेटवर्क की जड़ें काफी दूर तक फैली हो सकती हैं। फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की गहन जांच में जुटी हुई है और फरार आरोपियों की तलाश जारी है।
जंगलों के बीच चल रही इस खतरनाक ‘मोबाइल फैक्ट्री’ का खुलासा न सिर्फ चौंकाने वाला है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि अवैध कारोबार अब कितनी तेजी से तकनीक के सहारे फैल रहा है।


